सीबीआई जांच के दायरे में आने से उत्तराखंड के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), श्रीनगर में हड़कंप की स्थिति है। माना जा रहा है कि सामग्री खरीद के साथ ही अन्य शिकायतों की जांच से राज का पर्दाफाश हो सकता है।
सीबीआई की टीम ने पिछले दिनों एनआईटी में पूछताछ के साथ ही कुछ दस्तावेज अपने साथ ले गई थी। 18 जनवरी को भी टीम ने देहरादून में कुछ विभागाध्यक्षों से पूछताछ की है।
सीबीआई जांच के चलते यहां कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। हालांकि दबी जुबान में वह एनआईटी निदेशक प्रो. एचटी थोराट के निर्णयों पर उंगली जरूर उठा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, संस्थान में उपकरण और अन्य सामग्री खरीद में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। एनआईटी के पूर्व सहायक कुलसचिव डॉ. भोलाशंकर ने गत वर्ष इन अनियमितताओं की शिकायत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, बोर्ड ऑफ गवर्नेस के चेयरमैन सहित जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से की थी।
डॉ. भोलाशंकर बताते हैं कि एनआईटी ने 13 सितंबर 2013 को नागपुर की एक फर्म से 3.86 करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे थे। यह फर्म निदेशक के गृहक्षेत्र की है। जबकि यह उपकरण देहरादून और दिल्ली में मिल जाते हैं। उनका आरोप है कि खरीदे गए सामान की कीमत 50 लाख रुपये से अधिक नहीं है। संस्थान में बिना टेंडर के काम कराए जाते हैं।