फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

2014 में हिचकोले खाती रही उच्च शिक्षा की गाड़ी

Wed, 31 Dec 2014 11:54 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
नए साल की दस्तक साफ सुनी जा सकती है। यह साल यानी 2014 महज 10 दिन का मेहमान है। वक्त आ चुका है, यह हिसाब कर लिया जाए, इस साल से क्या मिला? साथ ही एक नजर डाली जाए, उम्मीद की उस किरण पर भी, जो नए साल का सूरज अपने साथ लेकर आएगा।
विज्ञापन


इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करने वाले ऐसे लोगों की भी बात होगी, जो जीवन में किसी के लिए भी प्रेरणादायी हो सकते हैं। शुरुआत आज से उच्च शिक्षा के साथ। उच्च शिक्षा की गाड़ी चुनिंदा मुद्दों में फंसी हिचकोले खाती रही। एक नजर इस क्षेत्र में रहे हालात, उम्मीद और उपलब्धि हासिल करने वालों पर....

आफत-सांध्यकालीन कक्षाएं
सांध्यकालीन कक्षाएं इस साल शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा मुद्दा बना रहा। इसे लेकर झिक-झिक होती रही। दरअसल, प्रदेश में उच्च शिक्षा के बुरे हालातों पर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर हुई थी, जिस पर फैसला लेते हुए हाईकोर्ट ने केवल अनुमन्य सीटों पर ही हर कॉलेज में दाखिले की बात कही थी।
विज्ञापन


इस वजह से प्रदेश के सबसे बड़े महाविद्यालय डीएवी पीजी कॉलेज सहित तमाम कालेजों में भारी संख्या में छात्र दाखिले से वंचित हो गए। ऐसे में प्रदेश सरकार ने छात्रों की सुविधा को देखते हुए ईवनिंग क्लासेज चलाने की घोषणा कर दी, लेकिन दिसंबर बीत गया, यह केवल सरकारी कॉलेजों तक ही सीमित रह गई। अन्य कॉलेजों के छात्र अभी भी आंदोलनरत हैं।

राहत-पैरामेडिकल संस्थानों की संबद्धता
सांध्यकालीन कक्षाओं पर झिक-झिक के बीच पैरामेडिकल संस्थानों की संबद्धता का मामला सुलझ जाना साल की एक बड़ी उपलब्धि रही। अमर उजाला ने ही इस मुद्दे को उठाया था। दरअसल, प्रदेश में जितने भी पैरामेडिकल संस्थान चल रहे हैं, उनकी संबद्धता पूरी नहीं थी।

गढ़वाल विश्वविद्यालय राज्य सरकार की ओर से भेजे जाने वाले पत्र के आधार पर छात्र-छात्राओं को परीक्षा में बैठने देता था। ऐसा सन्  2004-05 से चला आ रहा था, लेकिन इस साल विश्वविद्यालय ने प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं को अपूर्ण संबद्धता की वजह से परीक्षा में बैठने से इंकार कर दिया।

ऐसे में राज्य सरकार ने वर्षों से रुके पड़े पैरामेडिकल संस्थानों की अनापत्ति प्रमाण पत्र(एनओसी) को स्वीकृति दी। इसके अलावा हाईकोर्ट ने भी छात्र-छात्राओं के हित में ही फैसला दिया।

टूटा नकल का मकड़जाल

डीएवी पीजी कॉलेज में नकल के मकड़जाल पर एक खबर 1 अप्रैल 2014 को प्रकाशित हुई। इस खबर में कॉलेज में चल रही नकल और कॉलेज प्रशासन की लापरवाही को प्रमुखता से उजागर किया गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद कॉलेज में हड़कंप था।

डीएवी पीजी कॉलेज प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन ने टीम बनाकर सघन चेकिंग अभियान चलाया। इसमें एक छात्र पकड़ा भी गया। कई की पोल खुली। आरोपी शिक्षकों की पहचान हुई। नकल का मकड़जाल टूटा। इसकी खबर बीती 2 अप्रैल को अमर उजाला असर प्रकाशित हुई थी।

शाहरुख के सपनों को लगे पंख
सेंट जेवियर्स स्कूल से 67 प्रतिशत अंकों के साथ दसवीं पास करने वाले शाहरुख के पिता एग्जाम के वक्त आईसीयू में थे। उनकी दोनो किडनी खराब थी। बावजूद इसके शाहरुख ने परीक्षा दी और पास की। आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए शाहरुख के पास पैसा नहीं था।

अमर उजाला ने यह खबर 22 मई को प्रमुखता से प्रकाशित की। इसके बाद शाहरुख की फीस माफ हुई। अविरल क्लासेज ने कोचिंग मुफ्त करा दी। बलूनी क्लासेज ने शाहरुख की किताबों और ड्रेस के पैसे दे दिए। अमर उजाला का यह असर 26 मई के अंक में प्रकाशित हुई थी।
विज्ञापन

इन्होंने किया 2014 में नाम

देहरादून के ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के मैकेनिकल विभाग में अस्सिटेंट प्रोफेसर अरविंद मिश्रा ने लगातार सात दिन और सात रात पढ़ाकर गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया।

उन्होंने पौलेंड के शिक्षक शिक्षक इरॉल मुझावाजी का लगातार 121 घंटे पढ़ाने का रिकॉर्ड तोड़कर नया रिकार्ड 139 घंटे 42 मिनट और 56 सेकेंड कायम किया। एक मार्च से सात मार्च 2014 की रात एक बजकर 42 मिनट 56 सेकेंड तक चले इस मैराथन लेक्चर के दौरान अरविंद मिश्रा ने न केवल विवि बल्कि प्रदेश और राजधानी का नाम भी दुनिया के फलक पर खूब चमकाया।

उनके इस लेक्चर को दुनिया के 65 देशों में लोगों ने इंटरनेट के माध्यम से देखा। दो अप्रैल 2014 को अरविंद मिश्रा को ईमेल से इस रिकॉर्ड के बनने की सूचना गिनीज बुक की ओर से दी गई।

वेल्हम ब्वायज स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. गुनमीत बिंद्रा को इस वर्ष राष्ट्रपति ने शिक्षक पुरस्कार से नवाजा है। गुनमीत बिंद्रा न केवल शिक्षा में अलग पहचान रखती हैं बल्कि सीबीएसई बोर्ड की मुख्य कमेटी की सदस्या भी हैं।

बोर्ड की कई अहम फैसलों में उनका भी पूरा योगदान रहता है। विश्व स्तरीय वेल्हम ब्वायज स्कूल की प्राचार्य के तौर पर भी उनकी एक अलग पहचान कायम है। उनकी यह उपलब्धि दून के लिए अहम रही।

उम्मीद-2015:
1. डीएवी, डीबीएस, एसजीआरआर सहित प्रदेश के 14 अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षक भर्ती न होने से ईवनिंग क्लासेज अटकी हैं। उम्मीद है कि नए साल में इवनिंग क्लासेज की गाड़ी चल पड़ेगी और सरकार शिक्षकों की भर्ती का रास्ता भी साफ कर देगी।

2. डीएवी पीजी कॉलेज को धरोहर घोषित करने के लिए यूजीसी को 5 करोड़ का प्रस्ताव मार्च तक दिया जाएगा। उम्मीद है कि कालेज के नाम यह गौरव जुड़ेगा।

3. राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत इस वर्ष 150 करोड़ से अधिक की डिमांड केंद्र को भेजी गई है। इस पैसे से प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में मूलभूत ढांचा विकसित किया जाएगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें