उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में एक से आठवीं तक के छात्रों को निशुल्क दी जाने वाली पाठ्यपुस्तकों में गलतियां प्रकाशक/ फर्म को भारी पड़ेगी।
चेतावनी को गंभीरता से नहीं लेते प्रकाशक
शिक्षा सत्र 2014-15 से किताबों में गड़बड़ी पर संबंधित फर्म से कुल लागत का 15 प्रतिशत जुर्माना वसूला जाएगा। अभी मामूली जुर्माने की वजह से प्रकाशक अधिकारियों की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लेते। अधिकारियों को उम्मीद है कि अब किताबों में गलती नहीं मिलेगी।
हर साल करोड़ों रुपए के बजट से बच्चों के लिए निशुल्क पाठ्य पुस्तकों की व्यवस्था की जाती है, लेकिन किताबें न तो समय से मिलती हैं न ही इनकी गुणवत्ता ठीक रहती है। प्राथमिक शिक्षक संघ की जिला कार्यकारिणी की हाल ही में हुई बैठक में विभिन्न ब्लाकों से पहुंचे शिक्षकों ने यह मामला उठाया।
जिलाध्यक्ष वीरेंद्र कृषाली ने बताया कि किताबों की छपाई खराब है। कागज भी बेहद घटिया लगाया गया है। इसके अलावा कई चित्र और अक्षर उलटे छपे हैं।
अब तक छपाई और अन्य गड़बड़ी पर फर्म से पांच फीसदी जुर्माना वसूला गया है। लेकिन आगामी शिक्षा सत्र से इस तरह की गड़बड़ी पर 15 फीसदी एवं इससे अधिक जुर्माना वसूला जाएगा। आगे से पाठ्य पुस्तकों की छपाई में कोई गलती न हो इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
- सीमा जौनसारी, शिक्षा निदेशक