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डीएवी में हाजिरी मशीन नाकाम, बदलने की तैयारी

Tue, 16 Dec 2014 02:21 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उच्च न्यायालय के आदेश के बाद दून के डीएवी महाविद्यालय में हाजिरी मशीन (बायोमेट्रिक मशीन) पर हाजिरी दर्ज करना शिक्षकों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है।
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आठ दिन के भीतर ही मशीनें खराब होने लगी हैं। प्राचार्य ने नई मशीनें लगाने का निर्देश दिया है, फिलहाल रजिस्टरों पर ही उपस्थिति ली जा रही है।

डीएवी में आठ दिसंबर को हाजिरी मशीन से हाजिरी शुरू की गई थी। प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन ने निर्देश दिए थे कि 15 दिसंबर तक रजिस्टर और मशीन दोनों से हाजिरी होगी। इसके बाद सिर्फ मशीन पर ही उपस्थिति दर्ज की जाएगी, लेकिन मशीन की खराबी शिक्षकों और कॉलेज प्रशासन के लिए मुसीबत बन गई।

शिक्षक हाजिरी के लिए बार-बार अंगुली लगाने के बावजूद इंतजार में खड़े रहते हैं। हालांकि समस्या से निपटने के लिए कालेज प्रशासन ने कई अंगुलियों के निशान लिए थे लेकिन मशीन में हाजिरी नहीं लग पा रही है। सोमवार को समस्या बढ़ी तो प्राचार्य के पास शिकायत पहुंची।
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प्राचार्य ने मशीन की एक बार जांच करने के बाद खराबी पाए जाने पर दूसरी कंपनी की मशीन की व्यवस्था करने को कहा है। साथ ही उन्होंने रजिस्टर पर हाजिरी का विकल्प एक सप्ताह और आगे बढ़ा दिया है। प्राचार्य ने बताया कि अब 22 दिसंबर तक रजिस्टर और मशीन दोनों पर हाजिरी होगी।

डीबीएस में हाजिरी शुरू
डीबीएस महाविद्यालय में मशीन से हाजिरी शुरू हो गई। सोमवार को कॉलेज पहुंचे शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों ने मशीन में अंगुली लगाकर अपनी हाजिरी दी। कई शिक्षकों को हालांकि ट्राई अगेन का भी सामना करना पड़ा।

फर्जी दाखिलों पर प्रबंधन सख्त
डीएवी महाविद्यालय में बीए, बीएससी और बीकाम प्रथम वर्ष में हुए फर्जी दाखिलों पर महाविद्यालय प्रबंधन ने भी सख्त रवैया अख्तियार कर लिया है। प्रबंधन सचिव ने पूर्व जिला जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बना दी है। हालांकि, इसकी औपचारिक जानकारी अब तक कॉलेज प्राचार्य को नहीं मिली है।

डीएवी में इस बार वरीयता सूची (मेरिट लिस्ट) के आधार पर दाखिले दिए गए। इसके बावजूद बीए में 175, बीएससी में 13 और बीकॉम में आठ फर्जी दाखिले पकड़ में आए। विवि के नियमों के तहत 40 प्रतिशत कम से कम अंक होने चाहिए, लेकिन 36 प्रतिशत अंक तक के छात्रों को दाखिला दे दिया।

जानकारी पर प्रबंधन सचिव मानवेंद्र स्वरूप ने एक पूर्व जिला जज की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन कर दिया। इसमें कालेज के एक शिक्षक और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी रखा गया है। जांच समिति अपनी रिपोर्ट प्रबंधन को देगी, जिस पर प्रबंधन कार्रवाई करेगा।

प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन ने बताया कि अभी ऐसी कोई भी जांच की जानकारी उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। बता दें कि प्राचार्य के स्तर पर बनी जांच समिति पहले ही फर्जी दाखिलों की जांच कर रही है।

नौकरी का दूसरा मौका भी लटका
डीएवी महाविद्यालय में 15 दिन पहले आईबीएम कंपनी के रोजगार चयन (प्लेसमेंट) से वंचित रहे छात्र मंगलवार को प्रस्तावित बिजनेस प्रॉसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) कंपनी की चयन प्रक्रिया में भी शामिल नहीं हो सकेंगे। छात्र संगठनों की तालाबंदी के चलते प्राचार्य ने महाविद्यालय में आ रही कंपनी के अधिकारियों को पत्र भेज फिलहाल न आने का अनुरोध किया है।

डीएवी में नवंबर अंतिम सप्ताह में आईबीएम कंपनी प्लेसमेंट करने के लिए आई थी। दूसरे महाविद्यालयों के छात्रों को भी चयन प्रक्रिया में शामिल करने का आरोप लगाते हुए छात्रसंघ अध्यक्ष पारस गोयल ने कंपनी अधिकारियों और छात्रों को बाहर कर दिया था। आईबीएम कंपनी तब से दोबारा नहीं आई है।
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मंगलवार को कंपनी आईसॉन आने वाली थी, लेकिन सोमवार को छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद प्राचार्य ने कंपनी को पत्र भेज प्रक्रिया स्थगित करवा दी। प्राचार्य डॉ देवेंद्र भसीन ने बताया कि रोजगार चयन के लिए कंपनी के दोबारा बुलाया जाएगा। बताया कि प्रक्रिया में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके छात्रों को अवसर मिलेगा।
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