फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपीटीयू के नए कैम्पस के निर्माण में भी खेल

Sun, 06 Apr 2014 08:52 AM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के जानकीपुरम में निर्माणाधीन न्यू कैंपस के फर्स्ट फेज का काम दो साल पीछे चल रहा है।
विज्ञापन


इसी का फायदा उठाकर यूनिवर्सिटी में अधिकारियों की नाक के नीचे घोटालेबाजों ने फर्जीवाड़ा कर इस कैंपस के नाम पर 800 करोड़ रुपये का ठेका दे दिया।

इतना ही नहीं, यूनिवर्सिटी कैंपस का वर्तमान में निर्माण करा रहे राजकीय निर्माण निगम (आरएनएन) के भी हिसाब-किताब देने में पसीने छूट रहे हैं।

यूपीटीयू प्रशासन ने राजकीय निर्माण निगम से पूछा था कि अभी तक जो निर्माण हुआ, उसकी डिजाइन कहां से पास हुई, एनवॉयरमेंट का क्लीयरेंस है या नहीं।

इसका जवाब 15 दिनों के भीतर देने को बीते करीब डेढ़ महीने पहले ही दिया गया था और जवाब मिलने पर ही आगे की निर्माण की किश्त जारी करने के आदेश दिए गए थे लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला।

यही कारण है कि आगे की किश्त जारी न होने से काम अधूरा है। यानी, निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारण यूपीटीयू में डबल गेम हो रहा है।

वहीं, इससे पीजी के दर्जन भर नए कोर्स नहीं शुरू हो पा रहे हैं और न ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का काम हो पा रहा है। यूपीटीयू के जानकीपुरम स्थित न्यू कैंपस का निर्माण 32 एकड़ की जमीन पर किया जा रहा है।
विज्ञापन


इसमें 10 मंजिला एकेडमिक बिल्डिंग और आठ मंजिला एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग, कुलपति आवास, रजिस्ट्रार आवास सहित कई अधिकारियों के आवासों का काम धीमी गति से चल रहा है।

इस फर्स्ट फेज का निर्माण जुलाई-2012 को पूरा होना था लेकिन यह साल दर साल पिछड़ता गया। पहले इसे किसानों के आंदोलन के नाम पर रुका हुआ दिखाया गया।

फिर अधिकारियों ने इसकी डेटलाइन मार्च-2013, फिर जुलाई-2013 और फिर मार्च-2014 तय की लेकिन इस कैंपस का निर्माण कर रहा राजकीय निर्माण निगम इसे समय पर पूरा नहीं कर पाया।

इसके पीछे सबसे अहम कारण यह भी है कि उसे पहली किश्त के रूप में जो रकम दी गई उसका हिसाब मौजूदा कुलपति डॉ. आरके खांडल ने मांग लिया।

उन्होंने बिल्डिंग की डिजाइन, एनवॉयरमेंट क्लीयरेंस सहित कई बिंदुओं पर जवाब-तलब किया और इसके बाद ही आगे के काम के लिए रकम जारी करने का आदेश दिया। अब हालत यह है कि इनका जवाब देने में आरएनएन के हाथ-पांव फूल रहे हैं।

दूसरा, यह कि यूपीटीयू के इस कैंपस के नाम पर खुद यूनिवर्सिटी के ही लोगों ने महाराष्ट्र की पारिख कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड व प्रकाश कंस्ट्रोवेल लिमिटेड को 800 करोड़ रुपये का ठेका दे डाला।

13 अगस्त 2013 को हुए एग्रीमेंट के बाद से पारिख कंस्ट्रक्शन कंपनी के लोग यूनिवर्सिटी में आते थे, उनकी यहां पर कई बैठकें भी हुई हैं और इसके बाद ही उन्हें भरोसा हुआ कि काम आसानी से मिल जाएगा।

इसी का फायदा उठाकर यूपीटीयू के न्यू कैंपस के निर्माण का फर्जी ठेका इन्हें दे दिया गया। जब कंपनी को यूपीटीयू के औपचारिक मेल से काम करने का वर्क ऑर्डर दिया गया और उसके बाद वह कैंपस पहुंचा तो इस पूरे खेल से पर्दा उठा।

कंपनी एफआईआर से क्यों कतराई
यूपीटीयू में निर्माण कार्य के 800 करोड़ रुपये का फर्जी ठेका मिलने का खुलासा होने के बाद भी पारिख कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि अपनी ओर से एफआईआर लिखवाने से कतरा गए।

यूपीटीयू प्रशासन के सामने उन्होंने कहा भी वे एफआईआर को लेकर अधिक गंभीर नहीं है। सूत्रों की मानें तो गलत ढंग से फर्जीवाड़ा कर ठेका हथियाने के मामले पर कंपनी पर भी सवाल उठ सकते हैं।

कारण, इतनी बड़ी कंपनी ठेका लेने जा रही हो, वह आज तक कुलपति, प्रतिकुलपति जैसे बड़े अधिकारियों से एक बार भी नहीं मिली। इनके नीचे के अधिकारी भी कंपनी से न मिलने की बात कह रहे हैं।

वहीं, सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र की इस कंस्ट्रक्शन कंपनी पर वहां काम के दौरान अंगुलियां उठी थीं। ऐसे में मामले के तह में जाने पर अभी बड़ा खेल उजागर होगा।
विज्ञापन


यूपीटीयू के कुलपति डॉ. आरके खांडल ने एडीजी विजलेंस को पत्र लिखकर मामले की जांच करवाने और रजिस्ट्रार यूएस तोमर को जानकीपुरम थाने में एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दो दिन पहले ही दे दिए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें