उत्तराखंड में इंजीनियरिंग के बाद अब बीएड कॉलेजों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। गढ़वाल विवि के तीन कॉलेजों ने इस साल बीएड में एडमिशन ही नहीं लिए।
हर कॉलेज में छात्र संख्या महज पांच से आठ
हालांकि, इसकी सूचना अभी विवि को नहीं भेजी गई है। इन कॉलेजों में हर साल भारी भीड़ देखने को मिलती थी। इस साल 15 से ज्यादा बीएड कॉलेज ऐसे हैं, जहां छात्रों की संख्या महज पांच से आठ तक ही रह गई है।
गढ़वाल विवि से संबद्ध 46 निजी बीएड कॉलेजों में इस बार जबर्दस्त सन्नाटा है। इन कॉलेजों में करीब 80 फीसदी सीटें खाली हैं, लेकिन विवि की तीनों परिसरों की सीटें फुल हो गई हैं।
कुल छह हजार बीएड सीटों के लिए प्रदेशभर से 16500 छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से नौ हजार छात्रों को योग्य घोषित किया गया था। लेकिन, दाखिले की बारी आई तो छात्र गायब हो गए।
विवि ने नहीं दी राहत
कॉलेजों पर संकट को देखते हुए एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट ने विवि का दरवाजा खटखटाया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल कार्यवाहक कुलपति एलजे सिंह से मिला।
उन्होंने बताया एनसीटीई के नियमानुसार जब ग्रेजुएशन में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्य अर्हता का पालन किया जा रहा है तो विवि प्रवेश परीक्षा में 40 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता खत्म करे।
इस पर विवि ने आगामी अकादमिक काउंसिल की बैठक में मामला रखने की बात कही। हालांकि, इस बैठक में अभी वक्त है, तब तक इस नियम से राहत नहीं मिल पाएगी।