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इस 'वैज्ञानिक' ने हाथ नहीं पैरों से लिखी किस्मत

Tue, 09 Dec 2014 10:05 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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मन में कुछ करने की लगन हो तो कोई भी मुश्किल बाधा नहीं बन सकती। यह कर दिखाया है राज्य बाल विज्ञान कांग्रेस में शामिल होने पहुंची चमोली के देवाल की बाल वैज्ञानिक अंकिता तोपाल ने।
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अंकिता दोनों हाथ से पैदाइशी विकलांग हैं। वे पैरों की मदद से लिखती है। इसके बावजूद उसने क्षेत्र के दो गांवों पर शानदार प्रोजेक्ट तैयार किया। बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रदेश भर के 143 बाल वैज्ञानिकों ने मुख्य विषय जलवायु एवं मौसम के छह उप विषयों पर शानदार प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए।

जिसमें राजकीय कन्या हाईस्कूल देवाल की नवीं कक्षा की छात्रा अंकिता ने देवाल ब्लॉक के इच्छोली एवं सैलखोला गांव पर प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। जलवायु, मौसम एवं स्वास्थ्य पर प्रस्तुत प्रोजेक्ट में छात्रा ने दर्शाया कि बदलते मौसम के चलते गांव में किस तरह से परंपरागत खेती में उत्पादन घटता जा रहा है।
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चार साल की उम्र में सीख लिया था पैर से लिखना

इसके प्रति ग्रामीणों में जागरूकता आयी तो उन्होंने मौसम के अनुकूल फसलों का उत्पादन शुरू किया। वही उसने अक्सर भूस्खलन से क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों के चलते दूषित पेयजल की आपूर्ति और इससे बीमार होते लोगों की स्थिति को दर्शाया।

अंकिता ने कहा कि लाइनें क्षतिग्रस्त होने से दूषित पेयजल की आपूर्ति हो रही है जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। यही वजह है कि ग्रामीण पीलिया एवं आई फ्लू जैसे रोगो से पीड़ित हो रहे हैं।

अंकिता तीन भाई बहन है। उसके पैदाइशी हाथ मुड़े हुए हैं। यही वजह है कि वे हाथों से लिख नहीं सकते। उसकी स्कूल की शिक्षिका अनीशा थपलियाल बताती है कि वे लिखाई का सारा काम पैरों से करती है। अंकिता ने बताया कि चार साल की उम्र से उसने पैर से लिखना सीख लिया था।
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बच्चों में वैज्ञानिक सोच पैदा करना जरूरी

इस दौरान राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में शिक्षा सचिव डॉ. एमसी जोशी ने छात्रों में वैज्ञानिक सोच का विकास करने की जरूरत जताई। उन्होंने छात्रों से कहा कि काम के प्रति लगन और मंजिल पाने की धुन से ही वे वैज्ञानिक बन सकते हैं।

रविवार को नवोदय विद्यालय में सचिव डॉ. जोशी ने विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया। उन्होंने महान वैज्ञानिकों की ओर बच्चों का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि विज्ञान को समझें और जीवन व समाज को अच्छा बनाने की दिशा में काम करें।

विशिष्ट अतिथि यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि देश में विशेषकर उत्तराखंड में विज्ञान के क्षेत्र में बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए बहुत कुछ किया जाना है। इस दौरान विज्ञान संचारक सम्मान गोविंद बल्लभ पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. लोक मान सिंह पालनी को प्रदान किया गया।

केदारनाथ आपदा की वजहों पर गलत तर्क
यूकास्ट महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल का मानना है कि केदारनाथ आपदा में हुई तबाही के लिए नदियों के किनारे बसावट को वजह बताना गलत है। उनका कहना है कि कुछ लोगों ने ऐसे तर्क दिए हैं, लेकिन नदियों के किनारे बसने से आपदा नहीं आती। इसके लिए भौगोलिक, मौसम, पर्यावरणीय परिस्थितियां और विकास के तरीके जिम्मेदार होते हैं।
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