फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमेरिकन पैटर्न से होगी परीक्षा, तो होगा यह फायदा

विज्ञापन
विज्ञापन
केजीएमयू से बीडीएस करने वाले छात्र-छात्राओं की अब अमेरिकन पैटर्न से परीक्षा ली जाएगी।
विज्ञापन


संस्थान बीडीएस के परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। 2014-15 सत्र से इसे लागू किया जाएगा।

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के परीक्षा लेने के तरीकों को पहले आंतरिक परीक्षाओं में लागू किया जाएगा।

छात्र-छात्राओं को एक बार यदि ये पैटर्न समझ में आ गया तो इसे फाइनल परीक्षाओं में भी लागू कर दिया जाएगा।

ऑब्जेक्टिव पैटर्न पर होगा फोकस

केजीएमयू में परीक्षा लेने का तरीका 1960 के दशक का है। इसमें समय-समय पर कुछ बदलाव किए गए लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले चिविवि के छात्र-छात्राएं पिछड़ गए हैं।

कुलपति प्रो. रविकांत ने कार्यभार संभालने के कुछ दिन बाद ही परीक्षा पैटर्न को बदलने की कवायद शुरू कर दी थी। अब इसे अंतिम रूप दे दिया है। 2014-15 सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को नए पैटर्न से परीक्षा देनी होगी।

परीक्षा के नए तरीके में बहुविकल्पीय प्रश्नों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा प्रैक्टिकल या हैंड्स ऑन लर्निंग भी नए पैटर्न में शामिल होगी।

अभी तक केजीएमयू में दंत संकाय की आंतरिक परीक्षाओं में छह प्रश्न पूछे जाते हैं। जिनका विस्तृत उत्तर देना होता है। परीक्षा में मिलने वालों अंकों में से 10 फीसदी फाइनल परीक्षा के अंकों में जोड़े जाते हैं।

ये होगा फायदा

अमेरिकन पैटर्न से परीक्षा देने में छात्र-छात्राओं को फायदा होगा। उनको अधिक अंक मिलेंगे।

जिससे वो यूपी लोक सेवा आयोग और आर्मी में डॉक्टरों की भर्ती में शामिल होने की अर्हता पा लेंगे। केजीएमयू में मार्किंग कड़ी होने के कारण अच्छे से अच्छा छात्र भी 65 फीसदी से अधिक अंक नहीं पाता है।

जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में खुले हाथों से नंबर बांटे जाते हैं। इससे मेरिट में केजीएमयूम के छात्र-छात्राएं पिछड़ जाते हैं।

आर्मी में भर्ती केलिए कट ऑफ ही 70 फीसदी है। ऐसे में केजीएमयू के छात्र-छात्राएं वहां आवेदन ही नहीं कर पा रहे हैं।

अमेरिकन पैटर्न में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें पूरा कोर्स शामिल होता है। इससे बच्चे को पूरा पाठ्यक्रम तैयार करना होगा।
विज्ञापन

नए पैटर्न से मुकाबले में मिलेगी मदद

केजीएमयू में छात्र-छात्राएं दोनों ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं। एक साल में एक लाख से अधिक मरीजों का इलाज अस्पताल में किया जाता है।
इसलिए वो अनुभव में भी अन्य कॉलेजों से काफी आगे हैं लेकिन परीक्षा पैटर्न पुराना होने के कारण वो अंकों में लगातार पिछड़ रहे थे। नया पैटर्न उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे आने में मदद करेगा।

-प्रो. एपी टिक्कू,
डीन, केजीएमयू डेंटल फैकल्टी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें