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मां की मौत, पिता को पैरेलाइसिस, स्कॉलरशिप ने दिया सहारा

Mon, 14 Jul 2014 03:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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एक साधारण परिवार से ताल्लुकात और घर में तमाम तरह की विपरीत परिस्थितियां...। इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज (आईआरएस) आफिसर बन गए। ऐसे शख्सियत हैं रायपुररानी के गांव गढ़ी कोटाहा के सुंदरलाल सैनी।
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अपनी मां को खोने और पिता को पैरेलाइसिस होने के बाद सुंदरलाल सैनी को एक बार ऐसा लगा, जैसे सब कुछ थम सा गया हो। लेकिन, आंखों में सपने थे और लक्ष्य पर निशाना।

इन्हीं दो पहलुओं को मजबूत करते हुए वह हौसले के साथ कदम बढ़ाते गए और आखिरकार आईआरएस अफसर बनने में कामयाब रहे। फिलहाल, सुंदरलाल अमृतसर में कस्टम डिपार्टमेंट में बतौर डिप्टी कमिश्नर कार्यरत हैं।
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स्कूल के बाहर भी निशुल्क पढ़ाते रहे सुंदरलाल
सुंदरलाल सैनी ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की और विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए बीएड में दाखिला लिया। वहां फ्री स्टूडेंटशिप में मामूली खर्च पर शिक्षा हासिल करने का मौका मिला।

पीजी के बाद उन्होंने गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल में बतौर गेस्ट टीचर पढ़ाना शुरू किया और इस दौरान बाहर भी बच्चों को निशुल्क पढ़ाते रहे।

सुंदरलाल जब पीजी कर रहे थे, तभी उनकी माता का निधन हो गया, जबकि पिता भी पैरेलाइसिस की वजह से बमुश्किल ही चल-फिर रहे थे। इन तमाम परिस्थितियों से जूझते हुए सुंदरलाल ने एक छोटे से गांव से देश की अग्रणी सेवा में अफसर बनकर पूरे परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया।

अमर उजाला फाउंडेशन की पहल को सराहा
सुंदरलाल ने कहा कि शिक्षा और बेहतर कैरियर बनाने के लिए जरूरी है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वालों को भी बेहतर सुविधाएं मिले, ताकि उन्हें भी अपनी प्रतिभा साबित करने का बराबरी से मौका मिले।

उन्होंने अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शुरू की गई छात्रवृत्ति की पहल की तारीफ करते हुए कहा कि इससे जरूरतमंद विद्यार्थियों को काफी फायदा मिलेगा। प्रतिभाओं को स्कॉलरशिप के रूप में प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे मंजिल को हासिल करना और आसान हो जाएगा।
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