केजीएमयू के नेत्र विभाग के 100 साल पूरा होने पर एक गेट-टु-गेदर का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन मुख्य अतिथि और पूर्व विभागाध्यक्ष स्व. प्रो. एमके मेहरा की पत्नी डॉ. प्रभा मेहरा ने किया।
इसमें अलग-अलग बैच के छात्र कई साल के बाद अपनी याद ताजा करने पहुंचे। 1982 बैच की डॉ. शोभा बनर्जी ने अपनी याददाश्त पर जोर डालते हुए बताया कि हर दिन अपने आप में एक चुनौती होता था।
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एक पेशेंट के साथ दिक्कत हुई, तो मेरे सुपरवाइजर प्रोफेसर का किस तरह चढ़ा, वह भूलने लायक नहीं।
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100 साल को पूरा होने पर एक यादगार के लिए बने एक साइनेज पर सभी एलुमनाई ने अपने साइन भी बैच के साथ किए। छात्र इस बीच लखनऊ और केजीएमयू की पुरानी यादों के साये में जाने के लिए यूनिवर्सिटी और शहर भ्रमण पर भी निकले।
गर्व है कि केजीएमयू से हूं
डॉ. बनर्जी का कहना था कि यह अपने आप में एक गर्व की बात है कि मैं जॉर्जियन हूं। किसी को जब बताना होता है कि मैंने अपनी मेडिकल की पढ़ाई कहां से पूरी की तो खुद को एक गर्व का अहसास होता है।
100 साल पूरे
डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि 1913 में विभाग की नींव रखी गई थी। एक फैकल्टी और विभागाध्यक्ष के साथ इसकी शुरुआत हुई। 1930 तक इसमें बड़े बदलाव डॉ. बीजीएस आचार्य की देखरेख में हुए।
1935 में एमएस कोर्स की शुरुआत हुई। 1951 में डिप्लोमा कोर्स शुरू हुआ। 1955 में विभाग को अलग से ऑफ्थल्मोलॉजी की इमारत मिली।