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पीयू में बरसों बाद गले मिले तो भावुक हो गई आंखें

Thu, 05 Dec 2013 09:51 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़।
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पुराने दोस्तों और सह कर्मचारियों से मिलने की चाहत रिटायर्ड कर्मचारियों को पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस में ले आई। बरसों बाद जब वे एक-दूसरे से मिले तो आंखें भावुक हो गईं।
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बुधवार को पंजाब यूनिवर्सिटी नॉन टीचिंग एसोसिएशन की ओर से पहली बार आजादी से पहले और बाद में पंजाब यूनिवर्सिटी से रिटायर्ड हुए नॉन टीचिंग कर्मचारियों के लिए गेट टूगेदर ‘अंतराल-2013’ का आयोजन किया गया।


पीयू के ओल्ड कन्वोकेशन ग्राउंड में सुबह 9 बजे से ही पंजाब, हरियाणा, हिमाचल से रिटायर्ड कर्मचारी अपने परिवार के साथ पहुंचने लगे।

कार्यक्रम में 450 से अधिक रिटायर्ड कर्मचारी पहुंचे। पहली बार नॉन टीचिंग कर्मचारियों के लिए आयोजित कार्यक्रम में गिद्दे, भंगड़े और स्किट ने रंग जमाया।
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बलराज शर्मा ने गुरदास मान का गीत गाया तो रवनीत, सरबजीत, प्रवीण, रविंद्र त्रिखा, पम्मी, मधु कुलदीप, परमजीत और किरण ने भी इन इवेंट में हिस्सा लिया।

पीयू से 2006 में एफडीओ पद से रिटायर्ड हुए अशोक भंडारी और पीयू पब्लिक रिलेशन विभाग के रिटायर्ड रमेश कुमार सेठी ने कहा कि पुराने साथियों से मिलकर बहुत ही अच्छा लगा है।

कार्यक्रम में पीयू कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर और रजिस्ट्रार प्रो. एके भंडारी, कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन डॉ. परमिंदर सिंह और एफडीओ विक्रम नैयर ने भी शिरकत की।

प्रो. ग्रोवर ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए एक लाख रुपये देने की घोषणा भी कर दी और नॉन टीचिंग से जुड़े सभी लंबित मामलों को जल्द हल करने का आश्वासन भी दिया। रिटायर्ड कर्मचारियों की मांग पर इस तरह के कार्यक्रम को हर तीसरे साल आयोजित करने पर सहमति बनी।
 
ट्रॉफी और प्रशंसा पत्र से किया सम्मान
नॉन टीचिंग एसोसिएशन प्रधान दीपक कौशिक की अगुवाई में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे सभी महिला और पुरुष रिटायर्ड कर्मचारियों को ट्रॉफी और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।

पीयू में नौकरी कर रहे और स्वतंत्रता सेनानी परिवार से जुड़े एमसी जोशी, शिव शर्मा, हरीश मेहरा और धर्म सिंह डोगरा को विशेष तौर पर सम्मानित किया गया। काफी रिटायर्ड कर्मचारियों ने भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम के लिए फंड जुटाने को लेकर अपनी सहमति दी।

पाकिस्तान बटवारे की यादों को किया ताजा
कार्यक्रम में 1947 भारत -पाकिस्तान बंटवारे के दुख को झेलने वाले दो रिटायर्ड कर्मचारियों ने पुरानी यादों को सांझा किया।  1945 में पंजाब यूनिवर्सिटी लाहौर में नौकरी ज्वाइन करने वाले 98 साल के मलूक सिंह और असिस्टेंट रजिस्ट्रार से रिटायर्ड हुए आरडी शर्मा सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रहे।

मलूक सिंह ने बताया कि उस समय के रजिस्ट्रार को उनके सामने ही मौत के घाट उतार दिया गया। डर के मारे ड्राइवर भी उनकी मदद के लिए नहीं आया। मलूक 1979 में पीयू चंडीगढ़ कैंपस से रिटायर्ड हुए। इनके बेटे जगमोहन कंग आजकल पीयू के कंप्यूटर सेल में सुपरिटेंडेंट पद पर हैं।


मलूक के साथ उनका परिवार भी कार्यक्रम में पहुंचा। 89 साल के आरडी शर्मा ने लाहौर से सोलन और फिर पीयू कैंपस के सफर को बहुत ही बेहतरीन तरीके से सभी के साथ सांझा किया। शर्मा ने बताया कि बंटवारे के बाद ऐसी हिंसा हुई कि उन्हें तो सब कुछ छोड़कर भारत आना पड़ा।


उन्होंने बताया कि बंटवारे के बाद सिर्फ एक बार उन्हें अपनी पुरानी यूनिवर्सिटी कैंपस के दीदार करने का मौका मिला। सेक्टर-44 के मकान नबंर 3537 में रहने वाले शर्मा पीयू में प्रशासनिक ब्रांच के कई अहम पदों पर रहे।
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