फर्जी पंजीकरण की जमीन तैयार करने को एक बार फिर से आईटीआई में खेल शुरू हो गया है। परीक्षाओं के ठीक पहले पोर्टल खोलकर निजी संस्थानों को फीडिंग का एक और मौका दिया जा रहा है। पिछले वर्ष भी यही हुआ था और 18 हजार फर्जी पंजीकरण हुए थे।
सूत्रों का कहना है कि ऐसा निजी आईटीआई के फर्जी दाखिलों को वैध करने के लिए किया जा रहा है, ताकि निश्चित तिथि के बाद हुए दाखिलों का पोर्टल पर पंजीकरण हो सके।
जिम्मेदारों का कहना है कि ऐसा फीडिंग में हुई कुछ गलतियों को ठीक करने के लिए किया जा रहा है, जबकि पोर्टल पर फीडिंग की गलतियां ठीक करने का ऑप्शन ही नहीं है। ऐसे में एक बार फिर फर्जी पंजीकरण किए जाएंगे।
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के दाखिलों में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए हर वर्ष राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद के पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है।
इस वर्ष 15 सितंबर रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख थी। बाद में इसे 30 सितंबर तक बढ़ा दिया गया। इसके बाद पोर्टल बंद कर दिया गया।
20 से 25 नवंबर तक खुलेगा पोर्टल
अब निजी आईटीआई की ओर से फीडिंग में हुई गलतियों को ठीक करने की बात कहते हुए पोर्टल 20 से 25 नवंबर तक खोले जाने के आदेश परिषद ने जारी किए हैं।
अब सवाल है कि जब त्रुटियां ठीक करने का ऑप्शन ही नहीं है, तो ऐसा कैसे होगा। सूत्रों का कहना है कि पिछले वर्ष की तरह ही इस बार भी फर्जी पंजीकरण के लिए पोर्टल खोला जा रहा है।
मालूम हो कि बीते साल इसी तरह पोर्टल खोलने के बाद करीब 18 हजार फर्जी पंजीकरण हुए थे।
चार्जशीट के बाद कार्रवाई का पता नहीं
जुलाई 2013 की परीक्षा में हुए फर्जी परीक्षार्थियों के बैठने की पुष्टि प्रमुख सचिव की गठित जांच टीम ने की थी। रिपोर्ट में प्रदेश के पांचों जेडी को फर्जीवाड़े का दोषी करार दिया गया था।
28 अगस्त को शासन ने सभी तत्कालीन जेडी के खिलाफ चार्जशीट जारी की थी। प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशक ने पांचों जेडी को आठ सितंबर को चार्जशीट सौंप दी थी। सभी आरोपी जेडी को चार्जशीट पर अपना पक्ष देना था।
चार्जशीट सौंपे दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका है लेकिन किसी जेडी ने अभी तक अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया। पांचों जेडी को दोबारा नोटिस जारी किया गया, ना ही उनके खिलाफ कार्रवाई हुई।
जुलाई 2013 की परीक्षा से पहले खुला था पोर्टल
जुलाई 2013 की परीक्षा से कुछ दिन पहले पोर्टल पर फीडिंग में कठिनाई की बात कहते हुए शासन की ओर से शासनादेश जारी किया गया था। 13 जून 2013 को जारी शासनादेश में साफ लिखा था कि निश्चित तिथि समाप्त होने के बाद पोर्टल बेहद विशेष परिस्थितयों में खोला जा रहा है।
ऐसा पहली और आखिरी बार है। इसके बावजूद पिछले शासनादेश की अनदेखी करते हुए बुधवार को प्रशिक्षण एवं सेवायोजन और व्यावसायिक परीक्षा परिषद के निदेशक ने 20 से 25 नवंबर के बीच पोर्टल खोलने का आदेश जारी कर दिया है।
वार्षिक परीक्षा में फर्जी रूप से पंजीकृत परीक्षार्थी न बैठें, इसलिए तय समय के अंदर पंजीकरण करना होता है। जुलाई 2013 की परीक्षा से ठीक पहले पोर्टल की गड़बड़ी की बात कहते हुए आईटीआई संचालकों को जून में छूटे स्टूडेंट्स को पंजीकृत करने का मौका दिया गया।
पोर्टल खुलते ही निजी आईटीआई संचालकों ने खूब फर्जी पंजीकरण कर डाले। यहां तक कि जो स्टूडेंट्स जुलाई 2014 की परीक्षा के लिए पंजीकृत थे, उनका पंजीकरण करके उन्हें जुलाई 2013 में ही वार्षिक परीक्षा दिलवा दी गई।
अखबार की खबर के बाद हुई थी जांच
‘ अमर उजाला’ ने 13 सितंबर 2013 को प्रकाशित अंक में इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। इसके बाद तत्कालीन प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने इस संबंध में जांच समिति का गठन किया था।
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में भरी फर्जीवाड़े की पुष्टि की थी। अनुमान के मुताबिक जुलाई 2013 की परीक्षा में करीब 18 हजार फर्जी परीक्षार्थी शामिल हो गए थे।
राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद् के निदेशक राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि पोर्टल पर फीडिंग के दौरान बहुत से आईटीआई ने गलती कर दी है। अभ्यर्थियों के नाम गलत हो गए हैं।
जन्म तिथि आदि में भी गड़बड़ी की बात निजी आईटीआई संचालकों ने कही है। निजी आईटीआई संचालकों की मांग पर पांच दिनों के लिए पोर्टल खोलने को मंजूरी दी गई है।
इस संबंध में शासन से निर्देश मिला है। वैसे भी सेमेस्टर सिस्टम होने के कारण फर्जीवाड़े की आशंका बहुत कम है।
राजकीय आईटीआई की खाली सीटें भरने के लिए शासन ने अभ्यर्थियों को एक मौका और देने का शासनादेश जारी किया है। इसके अनुसार दाखिले केवल राजकीय आईटीआई में होने हैं।
कहीं भी निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का जिक्र नहीं है। ऐसे में नए दाखिलों के लिए फीडिंग भी केवल राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के लिए ही होनी चाहिए थी।
इसके बजाय पोर्टल सभी के लिए खोला जा रहा है। इससे पिछले साल वाली कहानी दोहराने की आशंका है।