दिल्ली विश्वविद्यालय में फर्जी दाखिले के खुलासे के बाद एक बार फिर आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए केंद्रीयकृत दाखिला प्रक्रिया की मांग शुरू हो गई है।
कॉलेजों में सामने आए दाखिले में फर्जीवाड़े को लेकर डीयू प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे हैं। विशेषकर अनुसूचित जाति जनजाति के फर्जी दस्तावेज के आधार पर दाखिले लेने पर।
इससे कॉलेजों में दाखिला पा रहे विद्यार्थियों के चलते इस कोटे के हकदार छात्रों को नुकसान हो रहा है। डीयू के एससी, एसटी टीचर्स फोरम ने बीते सालों में अनुसूचित जाति-जनजाति छात्रों के लिए डीन छात्र कल्याण कार्यालय के माध्यम से चलने वाली केंद्रीयकृत दाखिला प्रक्रिया को फिर से बहाल करने की मांग की है।
फोरम के प्रमुख हंसराज सुमन का कहना है कि उस व्यवस्था में कोटे के छात्रों का पंजीकरण होता था। दस्तावेज की जांच के बाद उन्हें कॉलेज स्तर पर चुने गए कोर्स के हिसाब से दाखिला स्लिप दी जाती थी।