प्रदेश में चल रहे एक दर्जन से अधिक प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में भारी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं। तीन राउंड की काउंसलिंग के बाद बुधवार को खाली सीटें भरने के लिए स्पॉट एडमिशन राउंड भी प्राइवेट कॉलेजों को राहत नहीं दे पाया। स्पॉट राउंड में भी महज दो प्राइवेट कॉलेजों को छोड़ शेष कॉलेज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए।
आधा दर्जन से अधिक प्राइवेट कॉलेजों को तो स्पॉट एडमिशन राउंड में एक भी छात्र कॉलेज में दाखिला के लिए नहीं मिल पाया। प्रदेश भर के युवाओं के इंजीनियरिंग की तरफ घटते रूझान से प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रबंधक टेंशन में हैं।
कॉलेजों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि महज 20 से 25 विद्यार्थियों के लिए इंजीनियरिंग लेक्चरर के वेतन, बिल्डिंग, बिजली, पानी, लैबोरेटरी समेत अन्य खर्च कैसे पूरे हो पाएंगे। इससे भी बड़ी चिंता का विषय हर साल तकनीकी विवि हमीरपुर को दी जाने वाली एफिलेशन, रजिस्ट्रेशन और एग्जामीनेशन फीस की है। कम एडमिशन से प्राइवेट कॉलेजों के भविष्य पर तलवार लटकती नजर आ रही है।
इंजीनियरिंग कॉलेजों में ये ट्रेड- प्रदेश में चल रहे इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिविल इंजीनियरिंग, मेकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल इंजीनियरिंग और ऑटोमाबाइल में इंजीनियरिंग होती है।