माल के राम दुलारी आलोक कुमार महिला डिग्री कॉलेज की जमीन को लेकर विवाद है। जिस जमीन को प्रबंधक अपने नाम बता रहा है, उस जमीन के पांच हिस्से हैं।
पिता स्व. काशी प्रसाद की 21 मई 2010 को हुई मौत के बाद भाइयों के बीच जमीन को लेकर हुए विवाद के चलते मामला अपर मंडलायुक्त के न्यायालय में लंबित भी है।
इसके अलावा मैनेजमेंट का भी पुर्नगठन नहीं हुआ है। इसकी लिखित शिकायत प्रेम शंकर ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को शपथपत्र पर लिखकर की है।
उसने इस मामले में उमाशंकर को दोषी बताया है। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस कॉलेज को संबद्घता दे दी। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शिकायतकर्त्ता की एक बात नहीं सुनी।
गोमतीनगर स्थित इनोवेटिव कॉलेज की जमीन को लेकर विवाद है। जिस जमीन पर बीएड कॉलेज खोला गया है उसमें इसी संस्था का मैनेजमेंट कॉलेज भी चल रहा है।
जबकि बीएड कॉलेज के लिए अलग से पांच हजार वर्ग फुट जमीन होनी चाहिए। मैनेजमेंट व बीएड कॉलेज एक ही जमीन जो कि साढ़े सात हजार वर्ग फुट है उस पर चल रही है।
इतना ही नहीं एलडीए ने इसे इंटर कॉलेज चलाने के लिए जमीन लीज पर दी थी। एलडीए के प्रावधानों में जमीन को कोई सब लीज नहीं कर सकता।
मगर कॉलेज चल रहा है। खुद एलयू की जांच कमेटी की रिपोर्ट में जमीन विवादित होना और यहां अवैध ढंग से कोचिंग चलाए जाने पर आपत्ति की गई है। इसके बावजूद कॉलेज धड़ल्ले से चल रहा है।
ये दो उदाहरण हैं जो लखनऊ विश्वविद्यालय में फर्जी ढंग से संबद्घता बांटे जाने के खेल से पर्दा उठा रहे हैं। मगर यूनिवर्सिटी प्रशासन इन प्रकरणों से आंख मूंदे हुए है।
संबद्घता के इस खेल में प्रशासनिक भवन में बैठे अधिकारी व कर्मचारियों की मिलीभगत है। उनकी शह पर ही कॉलेज गड़बड़ियां करके भी आराम से चल रहे हैं।
माल क्षेत्र के राम दुलारी आलोक कुमार डिग्री कॉलेज के मामले की शिकायत करने वाले प्रेम शंकर कहते हैं कि उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए प्रमाण के साथ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. एसबी निमसे से शिकायत की थी।
एफिडेविट दिया था ताकि इसकी निष्पक्ष जांच हो और अगर यूनिवर्सिटी उन्हें कागजात में गलत साबित कर दे तो उन पर वह कार्रवाई कर सकती है।
प्रेमशंकर कहते हैं कि जमीन के स्वामित्व का विवाद भी अपर मंडलायुक्त कार्यालय में चल रहा है। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी प्रशासन कुछ सुनने को तैयार नहीं है।
दूसरी ओर गोमतीनगर में इनोवेटिव कॉलेज के मामले में कार्यपरिषद के निर्देश पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रो. जेके शर्मा व प्रो. एनके पांडेय की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की थी।
इस जांच कमेटी ने बीएड कॉलेज चलाने के लिए जमीन न होने, एक ही कैंपस में बीएड व मैनेजमेंट कॉलेज चलाने, इंटरमीडिएट कॉलेज के लिए एलडीए से लीज पर मिली जमीन को मनमाने ढंग से सबलीज पर देने और खुलेआम कैंपस में प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग चलाने की रिपोर्ट दी गई।
यूनिवर्सिटी प्रशासन के अधिकारियों ने इस कमेटी की रिपोर्ट को ताक पर रखकर कॉलेज को अस्थायी संबद्घता दे दी। इसके बाद इस रिपोर्ट को कार्यपरिषद की बैठक में रखा जाना था।
बीते 15 मई के आसपास रिपोर्ट मिलने के बावजूद 2 जून को हुई कार्यपरिषद की बैठक में इसे शामिल नहीं किया गया। इससे यूनिवर्सिटी प्रशासन के अधिकारियों की नियत पर सवाल खड़े हो रहे हैं।