दसवीं के विद्यार्थियों ने पंजाब सरकार की उम्मीदों से कहीं ज्यादा शानदार प्रदर्शन किया है। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को मुफ्त उच्च स्तरीय शिक्षा देने के मकसद से खोले जा रहे रेजीडेंशियल स्कूलों का गणित भी विद्यार्थियों के बेहतरीन प्रदर्शन से गड़बड़ हो गया है।
सरकारी स्कूलों के 80 फीसदी से ज्यादा अंक लेने वाले सभी विद्यार्थियों को यहां दाखिला दिया जाना था। पर ऐसे होनहार विद्यार्थियों की संख्या शिक्षा विभाग के अनुमान से कहीं ज्यादा हो गई है। जिसे लेकर शिक्षा विभाग असमंजस में है। स्कूलों में पहले सेशन केलिए दाखिले पांच जून से शुरू होने हैं, जबकि सेशन एक जुलाई से शुरू होगा।
यह मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का ड्रीम प्रोजेक्ट है। सरकारी स्कूलों के होनहार विद्यार्थियों को उच्चस्तरीय शिक्षा देने के मकसद से सरकार ने सूबे में छह रेजीडेंशियल स्कूल खोलने का फैसला किया था।
जिनके संचालन के लिए सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ क्वालिटी एजुकेशन फॉर पुअर एंड मेरिटोरियस स्टूडेंट्स इन पंजाब का गठन किया गया था। यही सोसाइटी अमृतसर, लुधियाना, पटियाला, बठिंडा, जालंधर, मोहाली में सीनियर सेकेंडरी रेसिडेंशियल स्कूलों का संचालन करेगी।
विद्यार्थियों का सारा खर्च उठाएगी सरकार
यहां फीस से लेकर रहने व खाने का सारा खर्च सरकार उठाएगी। विद्यार्थियों को कुछ भी नहीं देना होगा। सरकारी स्कूलों के 80 फीसदी या इससे ज्यादा अंक लेने वाले सभी विद्यार्थियों को यहां दाखिला देने का ऐलान किया गया था। सरकार को उम्मीद थी कि ऐसे विद्यार्थी ढाई-तीन हजार ही होंगे।
इसी आधार पर इन स्कूलों की क्षमता पांच सौ विद्यार्थी प्रति स्कूल रखी गई थी। पर विद्यार्थियों ने उम्मीद से परे प्रदर्शन किया। पंजाब के सरकारी स्कूलों के 4702 विद्यार्थियों ने 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक ले लिए। जबकि, छह स्कूलों की क्षमता सिर्फ तीन हजार है। ऐसे में सभी को दाखिला देना विभाग के लिए संभव नहीं है।
-- रेजीडेंशियल स्कूलों की खास बातें --
इंग्लिश मीडियम में होगी पीएसईबी की पढ़ाईस्मार्ट क्लासरूम में ई-कंटेंट से पढ़ाई होगीस्मार्ट साइंस लैब, आधुनिक लाइब्रेरीसॉफ्ट स्किल्स और पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर ध्यानप्रतियोगी परीक्षाओं के लिए खास क्लास होंगीकरिअर व गाइडेंस काउंसलर की व्यवस्थाछात्रों-छात्राओं के लिए अलग हॉस्टलप्रिंसिपल व स्टाफ कैंपस में ही रहेगाकैंपस में ही डिस्पेंसरी और स्टेशनरी शॉप होंगी
रेजीडेंशियल स्कूलों का बुनियादी ढांचा निर्धारित क्षमता के मुताबिक ही तैयार किया गया था। हर स्कूल की क्षमता पांच सौ विद्यार्थी रखी गई थी। अब इतने ज्यादा विद्यार्थियों को दाखिला नहीं दिया जा सकता। इसलिए मेरिट के आधार पर सीटें भरी जाएंगी।
अंजलि भांवरा, प्रमुख सचिव, शिक्षा विभाग