उत्तराखंड के अशासकीय स्कूलों में शिक्षकों की मनमानी नियुक्ति पर रोक के लिए अशासकीय विद्यालय शिक्षा अधिनियम-2006 में संशोधन का रास्ता साफ हो गया है। शासन को इसके लिए न्याय और कार्मिक विभाग की मंजूरी मिल चुकी है। संशोधन से स्कूल प्रबंधन अब अपने स्तर से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर पाएंगे।
प्रदेश में लगभग 600 अशासकीय विद्यालय हैं। इनमें से कई स्कूलों में इन दिनों शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इसमें कुछ स्कूलों की नियुक्तियों में मनमानी की शिकायतें मिली हैं। शिक्षकों और प्रिंसिपलों की नियुक्ति में पैसों के लेनदेन की शिकायत सामने आने के बाद शासन अशासकीय विद्यालयी शिक्षा अधिनियम में संशोधन करने जा रहा है।
इस संशोधन से स्कूल प्रबंधन शिक्षकों एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की अपने स्तर से नियुक्ति नहीं कर पाएंगे। शिक्षा सचिव माध्यमिक शिक्षा एमसी जोशी का कहना है कि अधिनियम में संशोधन का काम अंतिम चरण में है। इसके लिए न्याय विभाग की ओर से सहमति मिल चुकी है।
कार्मिक विभाग ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। अब प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। प्रयास है कि आगामी कैबिनेट की बैठक में इसे रखा जाए।
अशासकीय स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए हम लोक सेवा आयोग या फिर अधीनस्थ सेवा आयोग को इसके लिए अधिकृत करेंगे, शिक्षकों की नियुक्तियों में अनियमितताओं की शिकायतें आने के बाद यह कदम उठाया गया है।
- एमसी जोशी, शिक्षा सचिव माध्यमिक शिक्षा
सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर पा रही है, अशासकीय स्कूलों की नियुक्तियां सरकार के हाथ में जाने से स्थानीय युवाओं का रोजगार छिन जाएगा। इन स्कूलों में सैकड़ों युवा 10 से 15 साल से इस उम्मीद में बच्चों को पढ़ा रहे हैं कि स्कूलों के अनुदान में शामिल होने पर उनकी नौकरी पक्की हो सकेगी।
- त्रिलोक भंडारी, शिक्षक नेता, माध्यमिक शिक्षक संघ