उप्र. प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) से संबद्ध सभी 850 इंजीनियरिंग व कॉलेजों के स्टूडेंट्स के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें इंजीनियरिंग कॉलेज कम उपस्थिति दिखाकर परीक्षा में बैठने से रोकने की धमकी नहीं दे पाएंगे।
अभी कॉलेजों द्वारा स्टूडेंट्स की उपस्थिति कम दिखाकर धन वसूली की शिकायतें आम रहती हैं। मगर अब एकेडमिक मॉनीटरिंग सिस्टम (एएमएस) लागू होने के बाद इस पर लगाम लगेगी।
अब कॉलेजों को रोज छात्रों की उपस्थिति और लेक्चर व प्रैक्टिकल तक की जानकारी ऑनलाइन देनी होगी। इससे इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फॉर्मा व बीऑर्क आदि के छात्रों को राहत मिलेगी। उन्हें कॉलेज परेशान नहीं कर पाएंगे।
इस नई व्यवस्था को 2 जनवरी 2014 से लागू किया जाएगा। इसके लिए कॉलेजों से 31 दिसंबर तक फीडबैक भी मांगे गए हैं। ताकि इसमें कुछ नई चीजें जोड़ी जा सकें।
यूपीटीयू प्रशासन की ओर से सभी कॉलेजों के निदेशकों को पत्र भेजकर एकेडमिक मॉनीटरिंग सिस्टम को लागू करने की जानकारी दे दी गई है। इसके तहत स्टूडेंट व शिक्षक का एक अलग-अलग वेब पेज उपलब्ध रहता है।
इसमें किस दिन स्टूडेंट कॉलेज में उपस्थित और अनुपस्थित रहा। क्लास में कितने लेक्चर पढ़ाए गए और कौन-कौन से टॉपिक उसने पढ़े। इसके अलावा उसे कितने असाइनमेंट दिए गए।
यही नहीं, इंटरनल असेसमेंट के तहत क्लास टेस्ट में और प्रैक्टिकल में कितने नंबर मिले। इसके अलावा टीचर ने कितनी क्लास लीं और क्या-क्या पढ़ाया। यह उसके वेब पेज पर उपलब्ध रहता है।
यह यूपीटीयू की वेबसाइट पर रोज उपलब्ध रहेगा। इसे स्टूडेंट्स और अभिभावक कहीं भी देख सकते हैं। कोई गड़बड़ी होने पर स्टूडेंट शिकायत भी दर्ज करवा सकता है।
यही नहीं, प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए किन-किन टीचरों की ड्यूटी कहां पर लगाई गई है। इसका भी ब्यौरा रहता है। अभी ज्यादातर छात्रों की शिकायत रहती है कि उनसे कॉलेज में कोई अन्य बाहरी संस्था द्वारा चलाए जा रहे कोर्स को अलग से पढ़ने के लिए 5 से 6 हजार रुपये मांगे जाते हैं।
वह इससे इन्कार करते हैं तो कॉलेज उन्हें उपस्थिति कम दर्ज कर परीक्षा में रोकने की धमकी देते हैं। उन्हें इंटरनल असेसमेंट में कम नंबर देने की धमकी देते हैं, लेकिन अब रिपोर्ट ऑनलाइन होने से इस पर लगाम लगेगा।
शिकायत हो तो यहां करें संपर्क
यूपीटीयू प्रशासन ने सभी कॉलेजों को सख्त निर्देश भेजा है कि वह एकेडमिक मॉनीटरिंग सिस्टम को लागू करें और इससे संबंधित जो भी सुझाव हों उन्हें भेजें।
ताकि इसे और बेहतर ढंग से लागू किया जा सके। कॉलेजों को यह भी हिदायत दी गई है कि अगर उन्हें कोई परेशानी हो तो वह ईमेल से जानकारी हासिल कर सकते हैं।
एमटीयू के मॉड्यूल कारगर साबित
नोएडा स्थित पूर्ववर्ती महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एमटीयू) ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में इसे लागू किया था। इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं और कॉलेजों पर अंकुश लगा है।
अब महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एमटीयू) और गौतमबुद्ध टेक्निकल यूनिवर्सिटी (जीबीटीयू) के विलय के बाद दोबारा अस्तित्व में आई यूपी टेक्निकल यूनिवर्सिटी (यूपीटीयू) इसे लखनऊ सहित प्रदेश भर के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में लागू करने जा रही है।
क्योंकि करीब डेढ़ महीने पहले एमटीयू का अस्तित्व समाप्त होने के बाद यह व्यवस्था अधर में लटक गई थी।
अब संबद्धता के लिए भी कॉलेज करेंगे ऑनलाइन
उप्र. प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू ) से संबद्ध सभी इंजीनियरिंग कॉलेज अब संबद्धता के लिए ऑनलाइन आवेदन करेंगे। सभी कॉलेजों को यह माड्यूल ऑनलाइन उपलब्ध करवाया गया है।
यूपीटीयू प्रशासन के अनुसार, कॉलेजों को उनकी मेल आईडी पर यह मॉड्यूल उपलब्ध करवाया गया है और 21 दिसंबर से इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। अब वर्ष 2013-14 की संबद्धता के लिए कॉलेज ऑनलाइन आवेदन ही करेंगे।
इसके बाद अब संबद्धता को लेकर गड़बड़ी नहीं हो पाएगी। मालूम हो कि अभी 15 मई को निर्धारित तारीख के बाद भी संबद्धता देने का खेल चलता है।
हाल ही में यूपीटीयू ने 44 ऐसे कॉलेज पकड़े जो बिना संबद्धता के ही चलाए जा रहे थे। फिलहाल इस मामले की जांच की जा रही है।