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अब तक शुरू ही नहीं हुई बीएड की पूल काउंसलिंग

Mon, 16 Sep 2013 09:26 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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बीएड में खाली चल रहीं 33,045 सीटों को छह सितंबर से पूल बनाकर भरने के निर्देश थे लेकिन हफ्ते भर बाद भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है।
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अब बीएड कॉलेजों के संचालक लामबंद हो गए हैं। उप्र स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन जल्द ही शासन के अधिकारियों से बात करेगा कि उनके आदेश के बावजूद बीएड की सीटें भरने के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय कोई पहल क्यों नहीं कर रहा।

इस बार बीएड में दाखिले के लिए आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन गोरखपुर विश्वविद्यालय ने ही करवाया है। उप्र स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी कहते हैं कि शुरुआत से ही सीटों को भरने में गोरखपुर विवि ने लापरवाही दिखाई।
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अब पूल बनाकर सीटें भरने के शासन के निर्देशों पर भी कुछ नहीं किया जा रहा। सबसे ज्यादा 23, 615 सीटें मेरठ में खाली हैं। इसके बाद आगरा में 8,025 और कानपुर में 964 सीटें खाली हैं। रविवार को एसोसिएशन की बैठक में निर्णय लिया गया कि सीटें भरने का आदेश न मानने पर शासन से सख्त कदम उठाने की मांग की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि छह सितंबर को विशेष सचिव (उच्च शिक्षा) निधि केसरवानी की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि काउंसलिंग से छूटे हुए अभ्यर्थियों का पूल बनाकर विश्वविद्यालयवार खाली सीटों को भरा जाए। इधर, बीएड कॉलेजों के संचालक अब तक ऐसे किसी आदेश की जानकारी से इन्कार कर रहे हैं।
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बीएड में एससी-एसटी कैटेगरी के करीब दस हजार अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने काउंसलिंग के बाद मनपसंद कॉलेज न मिलने पर दाखिला नहीं लिया। अगर इन सीटों को भी जोड़ लिया जाए तो खाली सीटों की संख्या करीब 44 हजार हो जाएगी।
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