प्रदेश के पॉलीटेक्निक संस्थानों की 44 प्रतिशत सीटें इस साल दाखिला न होने के कारण खाली रहेंगी।
खाली सीटों में ज्यादातर सीटें निजी संस्थानों की हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश और शासन की सख्ती की वजह से संयुक्त प्रवेश परीक्षा में भी कोई दखल नहीं करना चाहता। ऐसे में हर साल की तरह निजी पॉलीटेक्निक संस्थानों के पास सीधे दाखिला का मौका नहीं है।
पहली बार तय समय में खत्म हुई पॉलीटेक्निक काउंसलिंग का असर इसकी सीटों पर साफ नजर आ रहा है। प्रदेशभर में विभिन्न ग्रुपों में पॉलीटेक्निक की एक लाख 13 हजार 256 सीटें हैं।
इस बार इनमें से केवल 62 हजार 993 सीटों पर ही दाखिले हुए हैं। बाकी की 50 हजार 263 सीटें खाली पड़ी हुई हैं।
छह अगस्त को काउंसलिंग के तीनों चरण खत्म होने के बाद संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद सचिव ने 10 अगस्त को पॉलीटेक्निक संस्थानों को प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों को सीधे दाखिला देने की अनुमति भी दी थी।
यह मौका केवल दो दिनों यानी 12 अगस्त तक ही था। राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों की ज्यादातर सीटें भर चुकी हैं।
निजी पॉलीटेक्निक संस्थानों की अपेक्षाकृत ज्यादा फीस जुटाना आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों के लिए आसान नहीं था और संस्थानों में सीटें खाली रहने की यह भी एक वजह रही।