लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध 44 कॉलेज मानक पूरे किए बगैर एक साल तक चलते रहेंगे। लविवि कार्यपरिषद ने इन कॉलेजों को मानक पूरा करने के लिए एक साल का समय दिया गया है।
सोमवार को हुई एलयू कार्यपरिषद की बैठक में इसके साथ ही शिक्षकों के प्रमोशन व अन्य मामलों पर निर्णय लिया गया।
विश्वविद्यालय से संबंद्ध 44 कॉलेज ऐसे हैं, जिनकी मान्यता के मानक पूरे नहीं हैं। ऐसे में विवि ने पिछले साल ही मान्यता समाप्त करने का अल्टीमेटम दिया था।
इसके बावजूद पढ़ाई चलती रही। कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में इन कॉलेजों का मामला कार्यपरिषद की बैठक में रखा गया।
विचार-विमर्श के बाद कॉलेजों को मानक पूरा करने के लिए एक साल और देने का निर्णय लिया गया। कार्य परिषद से अनुमति मिलने के बाद ये कॉलेज अपने यहां एडमिशन ले सकेंगे।
बैठक में शिक्षक कुमकुम मिश्रा, विवेक प्रसाद, नीता शर्मा, नलिनी पांडेय और अल्का श्रीवास्तव को कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति देने का लिफाफा खोला गया।
वहीं, डॉ. रत्ना कटियार को एसोसिएट प्रोफेसर पर प्रोन्नति देने का लिफाफा भी कार्य परिषद बैठक में खोला गया।
लविवि विश्वविद्यालय से काशी विद्यापीठ के कुलपति पद का कार्यभार संभालने वाले प्रो. एके पांडेय के भुगतान का मामला भी कार्य परिषद में रखा गया, जिस पर कार्य परिषद ने अपनी मुहर लगा दी।
बैठक में प्रो. नरसिंह पर लगे छेड़छाड़ के आरोप का मामला भी रखा गया लेकिन इसे अगली मीटिंग के लिए टाल दिया गया।
स्वामी विवेकानंद कॉलेज पर कोई कार्रवाई नहीं
निर्धारित सीट से ज्यादा एडमिशन लेने वाले स्वामी विवेकानंद लॉ कॉलेज पर कार्रवाई के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया।
स्वामी विवेकानंद लॉ कॉलेज ने अपने यहां निधारित सीट से ज्यादा दाखिले ले लिए थे। मामला सामने आने पर पर कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही थी।
इसलिए मामला कार्य परिषद के सामने रखा गया था। इसके बावजूद कॉलेज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।