यूपी आईटीआई मैनेजमेंट एसोसिएशन ने वार्षिक प्रणाली पर आधारित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की आखिरी परीक्षा में पोर्टल पर गैर पंजीकृत अभ्यर्थियों को शामिल करने की मांग की है।
दरअसल 15 जुलाई से शुरू हुई परीक्षा में पोर्टल पर गैर पंजीकृत करीब 30 हजार अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल नहीं किया गया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. बीएस तोमर के अनुसार व्यावसायिक परीक्षा परिषद के पोर्टल में गड़बड़ी है। इसके कारण करीब 30 हजार छात्र परीक्षा से वंचित रह रहे हैं।
भरवाए गए थे ओएमआर फॉर्म
डॉ. बीएस तोमर के अनुसार काफी दिनों से आईटीआई संचालक प्रशिक्षण व सेवायोजन निदेशालय और व्यावसायिक परीक्षा परिषद में अपना प्रत्यावेदन दे रहे हैं।
इसके बावजूद छात्रों का नाम पोर्टल पर फीड नहीं किया गया और न ही उन्हें परीक्षा में शामिल किया जा रहा है।
तोमर के अनुसार वर्ष 2013 में पोर्टल में गड़बड़ी के कारण सभी अभ्यर्थियों के ओएमआर फॉर्म भरवाए गए थे, इस बार भी वैसी व्यवस्था करनी चाहिए ताकि ये छात्र परीक्षा में शामिल हो सकें।
'आखिर यही क्यों चूकते हैं हमेशा?'
उधर प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशक अनिल कुमार का कहना है कि हर बार केवल वही 30-40 निजी आईटीआई संचालक ही पोर्टल पर पंजीकरण करने से क्यों चूक जाते हैं।
जुलाई 2013 की परीक्षा में भी पोर्टल पर गैर पंजीकृत ज्यादातर अभ्यर्थी इन्हीं आईटीआई से थे।
उन्होंने कहा कि निजी आईटीआई संचालक व्यावसायिक परीक्षा परिषद के पोर्टल में गड़बड़ी की बात कह रहे हैं लेकिन हाईकोर्ट ने भी इन निजी आईटीआई संचालकों के तर्क को खारिज कर दिया है।
15 जुलाई से चल रही परीक्षा
31 मार्च 2013 से पहले व्यावसायिक परीक्षा परिषद के पास प्रत्यावेदन जमा करने वाले 10 आईटीआई को जांच करने के बाद परीक्षा में शामिल किया गया है।
बाकी आईटीआई ने निर्धारित तिथि तक न तो पोर्टल पर फीडिंग करवाई और ना ही प्रत्यावेदन ही दिया ऐसे में उनको परीक्षा में शामिल करने का सवाल नहीं उठता।
वैसे भी 15 जुलाई से परीक्षा शुरू हो चुकी है। परीक्षा के प्रश्नपत्र और कॉपियों की व्यवस्था भारत सरकार करती है ऐसे में किसी भी सूरत में गैर पंजीकृत अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल करना संभव नहीं है।