पंजाब के शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने बुधवार को पंजाब स्कूल शिक्षा भवन ऑडिटोरियम में अंग्रेजी के टीचरों का टेस्ट लिया। इसमें ज्यादातर टीचर फेल हो गए। न तो वे अंग्रेजी में अपनी बात कह सके और न ही लिख सके। 100 शब्द लिखने को दिए गए थे, वह भी उनसे सही नहीं लिखे गए। और तो और टीचरों ने खराब रिजल्ट के लिए अजीबो-गरीब दलीलें दीं।
इस साल पंजाब के सरकारी स्कूलों के करीब 80 हजार बच्चे अंग्रेजी में फेल हुए हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए डॉ. चीमा ने खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के टीचरों की बैठक बुलाई। इसमें हर जिले से दस-दस सबसे खराब रिजल्ट वाले टीचरों समेत कुल 220 लोग शामिल हुए। जब टीचर आए तो वे बहुत डरे हुए थे। उन्हें आशंका थी कि आज उन पर गाज भी गिर सकती है। डीपीआई सेकेंडरी बलबीर सिंह ढोल ने उन्हें थोड़ा मोटिवेट किया तो वे सामान्य हुए।
डॉ. चीमा ने खारिज की दलील
डॉ. चीमा ने दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सूबे में बहुत से सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके हालात अच्छे नहीं है। इसके बावजूद उनका नतीजा सौ फीसदी रहा। उन्होंने टीचरों से कहा कि उनका मकसद किसी को सजा देना या शर्मिंदा करना नहीं। न ही किसी टीचर पर कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मकसद है कि विषय का नतीजा बढ़िया बनाना है, जो टीचर इच्छुक हैं, उनके लिए ट्रेनिंग का इंतजाम करना है। टीचरों के सुझाव पर अमल किया जाएगा।
टीचरों नपे ये बताई फेल होने की वजह
टीचरों ने एक वजह यह भी रखी कि आठवीं तक फेल न होने के कारण बच्चे पढ़ते नहीं हैं। डॉ. चीमा ने बताया कि विधानसभा ने प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा है। सीएम ने पीएम को पत्र लिखकर पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाएं कराने की मांग की है, लेकिन टीचरों को मौजूदा साधनों और नीतियों के तहत अच्छे नतीजे लाने को मेहनत करनी चाहिए।
कई टीचरों का पूरा वाक्य ही गलत था
इससे पहले उनके मोबाइल फोन बंद करवा दिए गए थे। एसईआरटी के अंग्रेजी के सब्जेक्ट एक्सपर्ट ने प्रोफार्मा की जांच की तो वे हैरान रह गए। ज्यादातर टीचरों ने ग्रामर और स्पेलिंग की गलतियां की थीं। कई टीचरों का पूरा का पूरा वाक्य ही गलत था। प्रोजेक्टर के जरिए कुछ प्रोफार्मा स्क्रीन पर दिखाए गए कि टीचरों ने क्या गलतियां की थीं।
इतना ही नहीं, जब टीचरों से पूछा गया कि रिजल्ट खराब क्यों आया तो उन्होंने अजीबो-गरीब दलीलें दीं। किसी ने कहा कि विद्यार्थी गरीब हैं, तो किसी का कहना था कि इलाका पिछड़ा है। और तो और किसी टीचर ने कहा कि दूसरे कामों में ड्यूटी लगने के कारण रिजल्ट खराब आया।
...और जब पंजाबी में दिया जवाब
डॉ. चीमा की मौजूदगी में ही ढोल ने टीचरों से पूछा कि रिजल्ट खराब क्यों आया, तो टीचर पंजाबी में जवाब देने लगे। ढोल ने कहा कि यही बात अंग्रेजी में बोलें, तो टीचर बोल ही नहीं सके। फिर टीचरों को एक प्रोफार्मा दिया गया। इसमें उन्हें अपना जिला, पद, स्कूल का नाम, मोबाइल नंबर अंग्रेजी में लिखना था। इसके अलावा 50-50 शब्दों में यह लिखना था कि रिजल्ट खराब क्यों रहा और इसे कैसे सुधारा जा सकता है।