प्रदेश में तीन नए मेडिकल कॉलेज खोलने से भले ही 500 सीटें बढ़ गई हों, लेकिन राज्य सरकार के 12 में से 11 मेडिकल कॉलेज टॉपर्स को आकर्षित करने में नाकाम ही रहे हैं।
बेहतर संसाधनों के चलते टॉप 100 में शामिल अभ्यर्थियों ने लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) को ही चुना।
ऐसे में अब केजीएमयू के स्तर पर दूसरे मेडिकल कॉलेजों में संसाधन और सुविधाएं नहीं होने का सवाल उठ खड़ा हुआ है।
टॉपर्स को एडमिशन देने के मामले में केजीएमयू ने इस बार भी ही बाजी मारी। यहां टॉप 100 में से 82 छात्रों को प्रवेश मिले हैं।
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा को सफलता मिल सकी है। हालांकि, यहां भी केवल दो अभ्यर्थियों ने ही प्रवेश लिया। बाकी के 10 कॉलेजों में एक भी टॉपर ने प्रवेश नहीं लिया।
आरआईएमएस सैफई सहित पांच मेडिकल कॉलेज टॉप 200 की लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों की उपेक्षा का शिकार बने हैं।
टॉपर्स का कहना है कि उन्हें केजीएमयू के स्तर की सुविधाएं और माहौल किसी दूसरे कॉलेज में नहीं मिलता। सरकार अगर दूसरे मेडिकल कॉलेजों में भी फैकल्टी और सुविधाएं उपलब्ध कराए तो ही छात्र वहां एडमिशन ले सकेंगे।
कॉलेजों को नहीं किया विकसित
केजीएमयू की तर्ज पर दूसरे मेडिकल कॉलेजों को विकसित नहीं किया। कहीं पढ़ाने के लिए फैकल्टी की समस्या है तो कहीं लैब की अच्छी सुविधा नहीं। लाइब्रेरी से लेकर पढ़ाई की गुणवत्ता भी प्रभावित करती है। इन सभी मामलों में केजीएमयू काफी बेहतर है। ऐसे में यहीं प्रवेश को प्राथमिकता मिलती है।
- आयुष ओझा, सीपीएमटी टॉपर
केजीएमयू को बेहतर बनाने पर जोर
केजीएमयू एक स्वशासित यूनिवर्सिटी है। फैकल्टी या दूसरी जरूरतों को पूरा करने में वह खुद सक्षम है। इसके अलावा वह सबसे पुराना मेडिकल कॉलेज है। इसका भी असर पड़ता है। फैकल्टी नियुक्त करने के लिए हमें आयोग के सहारे रहना होता है। बजट की भी समस्या रहती है। इसके बाद भी दूसरे मेडिकल कॉलेजों में सुविधाएं बेहतर करने पर काम चल रहा है। जल्दी ही परिवर्तन देखने को मिलेंगे।
- डॉ. केके गुप्ता, महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा