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'उपभोक्ताओं के लिए अच्छी है जीरो फाइनेंस स्कीम'

Tue, 08 Oct 2013 06:27 PM IST
हरवीर सिंह/दिल्ली
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देश की आर्थिक हालत, रुपये की स्थिति, ब्याज दर आदि को लेकर अमर उजाला के सीनियर एडिटर हरवीर सिंह ने देश में निजी क्षेत्र के दूसरे सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य पुरी से लंबी बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ अंश:-
प्रश्न- हाल ही में रिजर्व बैंक ने टिकाऊ उपभोक्ता सामान के लिए जीरो इंटरेस्ट फाइनेंस स्कीम पर रोक लगाई है। यह फैसला भी जब त्यौहारी सीजन में आया है जब बिक्री बढ़ने का बेहतर मौका होता है। एचडीएफसी इस बिजनेस में अच्छी खासी हिस्सेदारी रखता है। रिजर्व बैंक के इस कदम पर आपकी क्या राय है?
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उत्तर-रिजर्व बैंक के इस फैसले का असर तो पड़ेगा। हमारा बहुत ज्यादा कारोबार तो नहीं है लेकिन मेरा मानना है कि कंपनियों और बैंकों के बीच अगर कोई समझौता है तो जीरो फाइनेंस स्कीम में कोई बुराई नहीं है। अगर मैन्यूफैक्चरर इंटरेस्ट सबवेंशन देना चाहता है और उपभोक्ता को सस्ता सामान मिलता है तो इसमें कुछ गलत नहीं है। इस योजना से बिक्री बढ़ती है। रिजर्व बैंक का कहना है इसमें पारदर्शिता नहीं थी। मेरा मानना है कि जीरो इंटरेस्ट स्कीम पारदर्शी हो सकती है। रिजर्व बैंक की सोच पर टिप्पणी तो नहीं करूंगा। लेकिन मेरी अपनी राय है कि यह योजना अच्छी योजना है। फायदा उपभोक्ता को मिलना चाहिए। इसके साथ खेल नहीं हो सकता है कोई भी कंपनी बैंक को फायदा नहीं देती यह उपभोक्ता को देती है ताकि उसकी बिक्री बढ़े।

प्रश्न-इस समय देश की आर्थिक स्थिति के बारे में आपका क्या कहना है? ब्याज दर ज्यादा है?

उत्तर-मैं एक बेहतर उम्मीद की किरण देख रहा हूं। वह कुछ तथ्यों पर आधारित है। चालू खाता घाटा नियंत्रण में आ रहा है। सोने के आयात पर अंकुश लगाया है। ड्यूटी बढ़ाई गई है। इसके आयात में कमी आना लाजिमी है। साथ ही बहुत सारे अटके परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इससे निवेश की शुरुआत हो गई है। हालात में काफी सुधार हुआ है। सरकार ने बहुत सारे फैसले लिए हैं। इसके साथ ही आरबीआई ने नॉन रेजिडेंट इंडियन को काफी अच्छी योजनाएं दी उससे देश में 15 अरब डॉलर से ज्यादा आ जाएगा। उसका नतीजा रुपये का मजबूती के रूप में आपने देख ही लिया। एक समस्या तो कम हो गई , पहले तो भागा ही जा रहा था। सोने का आयात घट जाएगा क्योंकि बैंकों ने इसके लिए फाइनेंस बंद कर दिया है।

प्रश्न-रुपये के 68 को पार करने की क्या वजह थी?
उत्तर-उस समय हवा फैली थी कि सीएडी बहुत बढ़ गया है। एफआईआई का पैसा नहीं आएगा। असल में उस समय बहुत नेगेटिव माहौल था। चालू खाता घाटा बहुत बढ़ गया था। कुछ स्पेकुलेशन भी हो गया। मेरा मानना है कि 60 के आसपास रुपया रहेगा। दो रुपये ऊपर या नीचे रहना चाहिए। रुपये में भारी गिरावट आर्टिफिशियल और स्पेकुलेशन पर आधारित थी।

प्रश्न-विकास दर पर आपका क्या कहना है?
उत्तर-जीडीपी 4.4 फीसदी पर आ गई थी। दूसरी तिमाही में यह पांच फीसदी से कुछ कम रहेगी। ऊपर वाले की मेहरबानी रही है मानसून अच्छा रहा है। मेरा मानना है कि तीसरी तिमाही से माहौल बदलेगा। फसल अक्तूबर में आएगी और अगर कृषि विकास दर चार फीसदी के आसपास आ गई तो यह विकास दर में 40 अंक की बढ़ोतरी कर देगा। कुछ निवेश आ जाएगा। वहीं कुछ निर्यात से आ जाएगा तो विकास दर पांच से छह फीसदी के बीच रहेगी। नई परियोजनाओं को मंजूरी से निवेश बढ़ जाएगा।

प्रश्न-निवेश का क्या माहौल है?
उत्तर-जो मौजूदा परियोजनाएं हैं वह तो चल पड़ी हैं। सरकार ने मंजूरी दी है। नये निवेश को अभी थोड़ा समय लगेगा और बैंकिंग से नया निवेश आने में अभी समय लगेगा। लेकिन अंतिम दो तिमाही में आ जाएगा।

प्रश्न-ब्याज दर को लेकर आपका क्या कहना है।
उत्तर-रिजर्व बैंक गर्वनर ने कहा कि महंगाई बढ़ गई है इसलिए लांग टर्म रेट मैं नीचे नहीं लाऊंगा लेकिन रुपए की कमजोरी रोकने के लिए जो शार्ट टर्म कदम उठाये थे उनको उनको वापस ले लेंगे। रिजर्व बैंक ने कहा है कि लांग टर्म ब्याज दरों पर अभी कुछ नहीं होगा लेकिन शार्ट टर्म ब्याज दरों को लेकर जो कदम उठाये थे उन्हें वापस किया जाएगा। उसके चलते ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी।

प्रश्न-आपको लगता है कि रिजर्व बैंक महंगाई को अकेले काबू कर लेगा?
उत्तर-रिजर्व बैंक अकेले महंगाई को काबू नहीं कर सकता है। अकेले मॉनेटरी पॉलिसी से यह संभव नहीं है। इसके लिए फिस्क्ल और मॉनेटरी दोनों तरह के कदमों की जरूरत है। आपूर्ति बढ़ाने के कदम जरूरी हैं। इस साल मानसून बेहतर है और वितरण व्यवस्था को बेहतर कर लें तो कामयाबी मिल सकेगी।

प्रश्न-लेकिन क्या बैंक ब्याज घटाएंगे?
अभी तो नहीं, लेकिन रिजर्व बैंक गवर्नर ने जो कहा है कि शार्ट टर्म ब्याज दरें कम करेंगे तो जरूर कम होगा लेकिन अभी समय लगेगा। रुपया, सीएडी, फिस्कल डेफिसिट, महंगाई की दर और तेल की कीमतें काबू में रहें तो कुछ माह बाद ब्याज दरें कम हो सकती हैं। लांग टर्म में अभी कमी नहीं आएगी।

प्रश्न-आपका कहना है कि भारत और इंडिया का कनवर्जेंस जरूरी है और इसके लिए फाइनेंशियल इनक्लूजन जरूरी है।
उत्तर-देखिए अभी गांवों और छोटे शहरों को अगर हम साथ लें तो 70 फीसदी आबादी बैठती है। दुकानदार, खेतिहर मजदूर, किसान और टू व्हीलर के लिए कर्ज देने वाले बहुत कम लोग हैं। मेरे लिए यह एक नया बाजार है।

प्रश्न-एचडीएफसी गांवों और छोटे शहरों पर किस तरह फोकस कर रहा है?
उत्तर-इस को लेकर हम गंभीर हैं। हम छोटे दुकानदारों, दुपहिया और गांवों में कर्ज देने की बहुत बड़ी पहल कर रहे हैं। हमारे कारोबार में अभी इसका शेयर 15 फीसदी है लेकिन यहां पर हमारा ब्रांच नेटवर्क कुल नेटवर्क का 55 फीसदी है। अगले चार पांच साल में हमारे कारोबार में इसका शेयर भी इसी अनुपात में होगा। इस ढांचागत सुविधा को खड़ा करने के लिए हम निवेश कर चुके हैं अभी हमें कुछ नया खर्च करना नहीं है लेकिन अब सिर्फ कारोबार आएगा। हमें मालूम भी नहीं पड़ा कि कितनी लागत आई। अभी जितना धंधा आ रहा है उससे हम खुश हैं। इसमें मुझे बहुत विकास की संभावना दिख रही है। गांवों और छोटे शहरों को लेकर हम बहुत गंभीर हैं।

प्रश्न-कृषि उत्पादों की खरीदारी की प्रक्रिया और कृषि क्षेत्र पर आपका क्या फोकस है?
उत्तर-हम किसान और आढ़तियों के साथ राज्य सरकार को जोड़ रहे हैं। पंजाब में हमने पनग्रेन के साथ करार किया है। इसके तहत हम किसान को होने वाले भुगतान की अवधि को 20 दिन से घटाकर तीन चार दिन पर ले आएंगे। इसी तरह गुजरात में दुग्ध सहकारी समितियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। जिसको पैसा देना है, जिसे उत्पाद खरीदना है और जिसे भुगतान होना है उन सभी को शामिल कर एक चक्र पूरा होता है। इसे गुजरात और पंजाब के अलावा बाकी राज्यों में भी लागू कर रहे हैं। यह सबके लिए फायदेमंद है।

प्रश्न-किसानों को कर्ज देने में बैंक झिझकते हैं इसको लेकर आपकी क्या राय है?
उत्तर-मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि किसानों को कर्ज देना फायदेमंद नहीं है। हम किसानों को ट्रैक्टर और दूसरी चीजों के लिए कर्ज दे रहे हैं। मेरे लिए वे बहुत अच्छे ग्राहक हैं।

प्रश्न-माइक्रो फाइनेंस मॉडल फेल हो गया है, इस पर आपका क्या कहना है?
उत्तर-मैं मॉडल को फेल नहीं मानता, लेकिन लेकिन अगर आप बच्चे को कहें कि वह पढ़ाई करे और वह किताब नीचे रखकर सो जाए तो वह फेल तो होगा ही। सब ब्याज दर की बात कर रहे हैं। बात है कि कुछ कंपनियों ने अपना धंधा बढ़ाने और स्टॉक मार्केट में जाने के लिए गरीब आदमी को उपभोग के लिए कर्ज दे दिया। वह पहले से ही गरीब था, ऊपर से उसे कर्ज दे दिया। लेकिन यह नहीं देखा कि वह यह कर्ज लौटाएगा कैसे। हमने अपने सस्टेनेबल लाइवलिहुड इनीशिएटिव में पहले उसकी कमाई का इंतजाम किया, उसे ट्रेनिंग दी। इससे वह हमारा पैसा भी दे रहा है और खुद भी कमा रहा है।
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प्रश्न-इस साल एचडीएफसी की ग्रोथ क्या रहेगी?
उत्तर-इस पर मै अभी कुछ नहीं कह सकूंगा क्योंकि हम सेबी के नियमों से बंधे हुए हैं।

प्रश्न-क्या ऑटो लोन और कंज्यूमर लोन में बढ़ोतरी शुरू हुई है?
उत्तर-इसमें सुधार आना शुरू हो गया है।

प्रश्न-नए बैंकों को लाइसेंस पर आप की क्या राय है?
उत्तर-बाजार है, मांग है, आपूर्ति बढ़नी चाहिए। सरकार को नए बैंकों के लिए लाइसेंस देने चाहिए। हम प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हैं।

प्रश्न-नए बैंकों में पुराने निजी बैंकों से कर्मचारियों के जाने की संभावना पर क्या कहना है?
उत्तर-सबको फ्रीडम है, डेमोक्रेटिक देश है अगर कोई ले जा सकता है तो ले जाए। लेकिन जिस डेडिकेशन के साथ हमारे कर्मचारी एक परिवार की तरह काम करते हैं। हो सकता है कुछ लोग जाएं लेकिन इससे कोई बड़ा फर्क पड़ने वाला नहीं हैं।
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