महंगाई की मार ने समाज की तमाम वर्ग की महिलाओं को रोजगार के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष करीब डेढ़ करोड़ महिलाओं ने रोजगार एक्सचेंज में अपना पंजीकरण कराया है। श्रम मंत्रालय के मुताबिक हाल के वर्षों में महिलाओं के पंजीकरण का प्रतिशत तेजी से बढ़ा है।
मंत्रालय के मुताबिक, वर्ष 2010 में 1 करोड़ 29 लाख 28 हजार महिलाओं ने देश के तमाम रोजगार एक्सचेंज में पंजीकरण कराया था। जबकि 2011 में यह संख्या 1 करोड़ 37 लाख तक पहुंच गई। हालांकि, श्रम राज्य मंत्री के. सुरेश का कहना है कि रोजगार एक्सचेंज में पंजीकरण का यह मतलब नहीं है कि इतनी बड़ी तादाद में महिलाएं बेरोजगार हैं। यह जरूर है कि वह रोजगार के लिए इच्छुक हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार सृजन के लिए लगातार प्रयासरत है। तमाम योजनाओं के जरिए महिलाओं और पुरुषों को समान रूप से रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। वहीं लघु उद्योग मंत्रालय की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ भी बड़े पैमाने पर महिलाएं उठा रही हैं। लेकिन, यह सच है कि पहले के मुकाबले महिलाएं ज्यादा संख्या में रोजगार के लिए सामने आ रही हैं।
दूसरी ओर, समाजसेवी रंजना कुमारी का कहना है कि सरकार को महिला सशक्तीकरण के साथ उनके लिए रोजगार के नए अवसर पेश करने पर भी ध्यान देना चाहिए। महंगाई की वजह से निम्न और मध्य वर्ग की महिलाओं का नौकरीशुदा होना जरूरी हो गया है। रोजगार एक्सचेंजों में महिलाओं की बढ़ते पंजीकरण से यह साफ है कि जीवन यापन के लिए नौकरी की जरूरत अब महिला वर्ग में भी बढ़ रही है।
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में करीब चार लाख और राजधानी दिल्ली में 2 लाख से ज्यादा महिलाओं ने पिछले वर्ष रोजगार के लिए पंजीकरण कराया था। तमिलनाडु में इनकी संख्या 33 लाख, केरल में 26 लाख और पश्चिम बंगाल में 21 लाख से अधिक है।