एटीएम की सुरक्षा बढ़ाने के नाम पर बैंक अब फीस बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसके तहत न केवल पांच मुफ्त ट्रांजेक्शन की सीमा में कमी हो सकती है। बल्कि, अगर बैंकों की चली तो वह शहरों के आधार पर भी फीस तय कर सकते हैं।
अभी अधिकतम फीस राशि तय करने का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक के पास है। लेकिन यह अधिकार भी रिजर्व बैंक बैंकों को देने की तैयारी में हैं। इसका मतलब है कि बैंक यह तय करेंगे कि वह मुफ्त ट्रांजेक्शन की सीमा ग्राहकों द्वारा इस्तेमाल कर लेने के बाद ग्राहक से कितनी फीस लेंगे। अभी रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए यह अधिकतम 20 रुपये सीमा तय की हुई है।
महंगा हो जाएगा एटीएम से पैसे निकालना
बीते नवंबर में बंगलूरू के कॉरपोरेशन बैंक के एटीएम में एक महिला पर हुए हमले के बाद से ही बैंकों पर सुरक्षा बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। जिसके लिए बैंक फीस बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, ताकि वह गार्ड आदि के जरिए एटीएम की सुरक्षा बढ़ा सके।
इसके लिए एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक के प्रतिनिधियों की समिति बनी हुई है, जो कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और आरबीआई के साथ मिलकर फीस बढ़ाने का फार्मूला तैयार कर रही है।
बड़े शहरों में लगेगी ज्यादा फीस
बैठक में भाग लेने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि फीस बढ़ाने का अधिकार बैंकों को देने को लेकर मोटे तौर पर सहमति बन गई है।
इसके अलावा बैंक शहरों के आधार पर मुफ्त ट्रांजेक्शन की सीमा तय करने का फार्मूला भी तैयार कर रहे हैं। जिसमें मेट्रो और बड़े शहरों में जहां सभी बैंकों का नेटवर्क अच्छा है, वहां ग्राहकों को मुफ्त ट्रांजेक्शन की छूट खत्म करने पर विचार किया जा रहा है।
जबकि छोटे शहरों और कस्बों में पांच मुफ्त ट्रांजेक्शन को पहले ही जैसा रखने की सहमति बन रही है। इस मामले में अंतिम फैसला भारतीय रिजर्व बैंक को लेना है, जिसके आधार पर एटीएम इस्तेमाल पर ग्राहकों से फीस लेने के नए नियम और दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे।