25 फरवरी को रेल बजट पेश हो चुका है और 29 फरवरी को आम बजट पेश होना है। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर रेल बजट आम बजट से अलग क्यों पेश किया जाता है। आइए जानते हैं इसका कारण।
1921 में ब्रिटिश रेलवे अर्थशास्त्री विलिमय एक्वर्थ को इंडियन रेवले कमेटी का चेयरमैन बनाया गया, जिसके बाद एक्वर्थ ने पाया कि रेलवे सिस्टम में बेहतर मैनेजमेंट की जरूरत है।
कमेटी की तरफ से रेलवे को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की गई, जिसे एक्वर्थ रिपोर्ट कहा गया। इस रिपोर्ट में रेलवे के पुनर्संगठन के बारे में कुछ बिंदुओं पर सुझाव दिए गए।
इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए 1924 में रेलवे को आम बजट से अलग करने का निर्णय लिया गया। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही ये प्रक्रिया आज भी लागू है और रेल बजट आम बजट से अलग पेश किया जाता है।