देश के बड़े हिस्से पर सूखे के खतरे के साथ महंगाई की आग भड़कने लगी है, लेकिन सरकार ने थोक और खुदरा महंगाई में कमी आने का दावा किया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून में थोक महंगाई दर चार महीने में सबसे कम 5.43 फीसदी रह गई है, जबकि खुदरा महंगाई जनवरी, 2012 के बाद सबसे कम 7.31 फीसदी बढ़ी है।
महंगाई में कमी के ये आंकड़े देखकर रिजर्व बैंक भले ही ब्याज दरें घटाने को तैयार हो जाए, लेकिन बाजार में बढ़ती महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ रही है।
क्या सच में कम हुई है महंगाई?
जून में थोक महंगाई दर मई में 6.01 फीसदी से घटकर 5.43 फीसदी पर आ गई है, जबकि पिछले साल जून में थोक महंगाई दर 5.16 फीसदी थी। इस दौरान थोक में आलू 42 फीसदी महंगा हुआ जबकि चावल पर 10.24 फीसदी महंगाई है।
खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई मई में 9.50 फीसदी से घटकर 8.14 फीसदी पर आ गई है। लेकिन फैक्ट्री में बने सामानों की महंगाई 3.55 से बढ़कर 3.61 फीसदी तक पहुंच चुकी है।
जून में प्याज 10.70 फीसदी सस्ता होने का दावा किया गया है। जबकि सब्जियों की थोक महंगाई करीब 6 फीसदी घटी है।
खुदरा महंगाई ढाई साल में सबसे कम
जून में खुदरा महंगाई ढाई साल में सबसे कम 7.31 फीसदी रही, जबकि पिछले साल इसी दौरान खुदरा महंगाई 9.87 फीसदी थी। इस दौरान खाने-पीने की चीजों की महंगाई मई में 9.56 फीसदी से घटकर 7.97 फीसदी पर आ गई है।
हालांकि, दुग्ध उत्पादों की महंगाई 11.06 फीसदी बढ़ गई है और फलों पर भी 20.64 फीसदी महंगाई है।
सब्जियों ने बिगाड़ा रसोई का बजट
आंकड़ों में दिखी महंगाई से राहत ज्यादा दिन रह पानी मुश्किल है। पिछले 15 दिनों में फल-सब्जियों के दाम भड़कने लगे हैं। दिल्ली के खुदरा बाजार में टमाटर 10-15 रुपये किलो से बढ़कर 45-55 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गया है।
हालांकि, प्याज के भाव 25-35 रुपये किलो के बीच थामे रखने में सरकार कामयाब रही है। लेकिन आलू के दाम 30-35 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। बारिश न होने से मौसमी सब्जियां खराब नहीं हुई हैं, लेकिन ढुलाई और भाड़ा बढ़ने से इनके भाव भी बढ़े हैं।
नेशनल हार्टिकल्चर रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन (एनएचआरडीएफ) के निदेशक आरपी गुप्ता का कहना है कि जून के बाद दिल्ली में हरियाणा, यूपी और राजस्थान का टमाटर आना बंद हो जाता है। अब यहां हिमाचल से टमाटर आ रहा है, जिसकी ढुलाई महंगी होने से दाम अधिक हैं।