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चाइनीज खिलौने में गुम हुआ विलेज ऑफ ट्वॉय

Wed, 07 Nov 2012 01:19 PM IST
चन्नापट्टना (बंगलूरू)/अरविंद बाजपेयी
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लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा... गीत आपके बच्चे को जरूर भाता होगा, लेकिन यह जानकार आपको हैरानी होगी कि लकड़ी की काठी और घोड़ा बनाने वालों के सितारे आजकल गर्दिश में हैं। बच्चों का बचपन में खिलखिलाहट लाने वाले ये खिलौने बनते हैं चन्नापट्टना में।
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यह एक छोटा सा गांव है, जहां के खिलौने विदेश में तो धूम मचा रहे हैं पर अपने देश में ही इनकी बिक्री 50 फीसदी तक गिर चुकी है। बंगलूरू और मैसूर के बीच स्थित यह गांव विलेज ऑफ ट्वाय के नाम से ही मशहूर है और यहां के कलाकार रहते हैं कलानगर में। लेकिन, अब इनके हाथों की कारीगरी को सस्ते चाइनीज खिलौने खत्म कर रहे हैं।

बच्चों के लिए चाहे लकड़ी का टिक-टिक घोड़ा हो या फिर उछलती कूदती गुड़िया। वुडन विसेल, लट्टू, विसेल जोकर रैटल, व्हीजर, अंब्रेला टाप, टिक टाक मैन सभी को तैयार करना और उनमें रंग भरने में कलानगर के कलाकार इतने माहिर हैं कि उनकी प्रतिभा के आगे कोई टिक नहीं सकता।
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ये कलाकार रंग भरने के लिए वेजीटेबल डाई का इस्तेमाल करते हैं। इस ग्रामीण इलाके के लोगों का मुख्य कारोबार भी यही है। घर में सजाने के लिए डेकोरेटिव पीस तो यहां ऐसे बनते हैं कि हर कोई देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है। यहीं कुछेक इंपोरियम भी हैं, जिनका धंधा इस वजह से चल रहा है कि विदेश में सप्लाई ज्यादा है।

टूरिज्म डिपार्टमेंट के असहयोग से मुश्किल
कलानगर के रहने वाले एमएन रविकिरन बताते हैं कि यह उनका फैमिली बिजनेस है, लेकिन एक साल से हालात बदल चुके हैं। जब दशहरा आता है तो खिलौने और डेकोरेटिव पीस की बिक्री बढ़ जाती है और फेस्टिवल खत्म होते ही सेल में गिरावट आ जाती है। पहले ऐसा हाल नहीं था।

चन्नापट्टना में ये खिलौने लेने के लिए टूरिस्टों की कतार लगी रहती थी। श्री कावेरी हैंडीक्राफ्ट इंपोरियम के एक अधिकारी के अनुसार, सेल में गिरावट की बड़ी वजह है टूरिज्म डिपार्टमेंट का असहयोग है। दुकानदारों को अपना साइनबोर्ड डिसप्ले करने की भी समस्या आती है और दूसरी समस्या है पार्किंग की। ऐसे में टूरिस्ट कम ही रुकते हैं।

कीमती हैं यहां के खिलौने
अपनी दुकान कर रहे फरीद खान ने बताया कि ये खिलौने थोड़े कीमती होते हैं, जबकि चाइनीज खिलौने सस्ते होते हैं। इसी वजह से लोग चाइनीज हाइटेक खिलौने ज्यादा पसंद करते हैं। सैयद के अनुसार, चाइनीज से बेहतर लकड़ी के खिलौने हैं क्योंकि ये बच्चों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

बच्चे अक्सर खिलौने को मुंह में डाल लेते हैं। ऐसी स्थिति में नुकसान ज्यादा होता है। कलानगर के लोगों को राहत देने के लिए डेवलपमेंट कमीशन और स्मॉल स्केल इंडस्ट्री डेवलपमेंट चन्नापट्टना ने मिलकर यहां चन्नापट्ना क्राफ्ट पार्क बनाया, लेकिन उससे भी ज्यादा रिस्पांस नहीं मिला।
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