सिटी बैंक के सीईओ पद से भारतीय मूल के विक्रम पंडित के अचानक इस्तीफे को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। चर्चा यह हो रही है कि क्या पंडित ने स्वेच्छा से बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद छोड़ा या फिर किसी दबाव के तहत उनको यह कदम उठाना पड़ा।
अमेरिकी मीडिया में छपी कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि भारतीय मूल के पंडित को बढ़ते दबाव के चलते अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। बैंक के संचालन व कामकाज की रणनीति और कारोबारी प्रदर्शन व नतीजों को लेकर पंडित व निदेशक मंडल के सदस्यों के बीच मतभेद काफी बढ़ गए थे। इस मतभेद के चलते ही पंडित को आनन-फानन में अपना पद छोड़ना पड़ा। हालांकि अचानक आए इस्तीफे से खुद अमेरिकी शेयर बाजार, कारोबारी जगत और अमेरिका का मीडिया भी हतप्रभ रह गया।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि पिछले करीब सालभर से पंडित के कई निर्णयों को लेकर बोर्ड के सदस्यों के बीच असहमति बढ़ती जा रही थी। कई निदेशकों का मानना था कि अनेक मौकों पर बैंक हालात से निपटने के कारगर और उपयुक्त नहीं कदम उठा सका, जिसका खामियाजा बैंक को अपने कारोबार में भुगतना पड़ा।
कई फैसलों के बारे में निदेशक मंडल को ठीक ढंग से सूचित न किए जाने की भी बात कही गई है। कुछ इसी तरह की बात दि फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कही है, जिसके मुताबिक कई गलत कदमों को लेकर बोर्ड के सदस्यों के साथ मतभेद बढ़ने के चलते पंडित को इस्तीफा देना पड़ा।
रिपोर्ट में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कुछ मानदंडों को पूरा कर पाने में सिटी बैंक की नाकामी और खुद विक्रम पंडित के वेतन को लेकर शेयरधारकों द्वारा पिछले दिनों उठाए गए सवालों को भी पंडित की विदाई की वजह बताया है।