फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड और हिमाचल के औद्योगिक पैकेज का रास्ता साफ

Fri, 11 Oct 2013 07:45 AM IST
अजीत सिंह/नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को 5 साल के लिए मिलने वाले विशेष औद्योगिक पैकेज का रास्ता साफ हो गया है।
विज्ञापन


पैकेज को केंद्र सरकार की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की हरी झंडी मिल चुकी है और जल्द ही प्रस्ताव मंजूरी के लिए कैबिनेट को भेजा जाएगा, लेकिन इस बार उद्योगों को पैकेज के तहत सब्सिडी दी जाएगी, लेकिन उत्पाद शुल्क और आयकर में छूट मिलना मुश्किल है।

औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के अधिकारियों का कहना है कि हिमाचल और उत्तराखंड के औद्योगिक पैकेज को व्यय वित्त समिति की मंजूरी मिलने के बाद कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है।
विज्ञापन


इस पर राज्य सरकारों के सुझाव भी मांगे गए हैं। सरकार जम्मू और कश्मीर को पहले ही इस तरह का पैकेज दे चुकी है, लेकिन वित्त मंत्रालय और योजना आयोग के बीच मतभेदों की वजह से उत्तराखंड और हिमाचल को पैकेज मिलने में देरी हो रही है।

पिछली बार वर्ष 2003 में वाजपेयी सरकार ने दोनों राज्यों को 10 साल के लिए औद्योगिक पैकेज दिया था। इसके तहत उत्पाद शुल्क और आयकर में मिली 100 फीसदी छूट ने देश भर के उद्योगों का रुख इन राज्यों की ओर मोड़ दिया था।

हालांकि वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2010 में इन रियायतों को बंद कर दिया था। दोनों राज्यों के पैकेज की अवधि भी इस साल 6 जनवरी को समाप्त हो चुकी है।

कई राज्यों की ओर से विशेष दर्जे और पैकेज की मांग से जूझ रही केंद्र सरकार ने उत्तराखंड और हिमाचल को 10 साल के बजाय 5 साल के औद्योगिक पैकेज देने का फैसला किया है।

राज्यों के पिछड़ेपन को मापने के मुद्दे पर रघुराम राजन समिति की रिपोर्ट के बाद राज्यों को मिलने वाली विशेष सहायता के तौर-तरीकों में बड़े बदलाव की तैयारी भी चल रही है।

ज्यादा उद्योगों को मिलेगा सब्सिडी का लाभ
उत्तराखंड और हिमाचल में विशेष पैकेज के तहत सब्सिडी का लाभ पाने वाले उद्योगों की संख्या बढ़ाई जा रही है। राज्यों में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए प्लांट व मशीनरी पर 15 फीसदी या अधिकतम 30 लाख रुपए की सब्सिडी देने की तैयारी है।
विज्ञापन


नए उद्योगों के लिए खुलेगी पहाड़ की राह
अभी कैमिकल, फर्टिलाइजर, पेंट, सीमेंट, सिंथेटिक रबर और चीनी मिलों जैसे कई उद्योगों के लिए दून वैली में पाबंदी है। प्रदूषण के लिहाज के उद्योगों को रेड, ओरेंज और ग्रीन की श्रेणियों में बांट गया है। नए पैकेज में इन श्रेणियों में बदलाव कर कई उद्योगों के पहाड़ में पहुंचने का रास्ता खोला जा सकता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें