अटके पड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने और उनकी मांग बढ़ाने के लिए कीमतों में कमी लाने की कवायद की जा रही है। इसके लिए रिवाइवल प्लान में प्रोजेक्ट को समय से पूरा करने के लिए एस्क्रो अकाउंट प्रणाली, प्रोजेक्ट निर्माण की अवधि भी नए सिरे से तय करने की सिफारिश की गई है।
वित्त मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के जरिये अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए एक रिवाइवल प्लान तैयार किया गया है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि जिन प्रोजेक्टों को दोबारा शुरू किया जा सकता है, उनके लिए पूंजी की व्यवस्था की जाए। साथ ही प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एक व्यावहारिक समय सीमा तय की जाए, जिससे कि घर लेने वाले ग्राहकों के ऊपर कर्ज का बोझ न बढ़े।
इसके अलावा, प्रोजेक्टों के लिए बैंकों के तरफ से पूंजी एस्क्रो अकाउंट के जरिए दी जाय। एस्क्रो अकाउंट के तहत एक निश्चित प्रोजेक्ट के लिए बैंक में खाते खोले जाते हैं। जिसमें प्रोजेक्ट के लिए चरणबद्ध तरीके से तय शर्तों के आधार पर बिल्डर को पूंजी दी जाती है। इससे बिल्डर परियोजना के लिए मिली राशि का उपयोग अन्य मदों में नहीं कर सकता।
अधिकारी के अनुसार, इन कवायदों के जरिये बिल्डरों के ऊपर भी दबाव बनेगा कि वह कीमतों में कमी लाएं। कीमतों में कमी आने से जहां मांग में तेजी आएगी। वहीं फंसी पूंजी भी निकलेगी। इसका फायदा सभी को मिलेगा। इसके पहले नेशनल हाउसिंग बैंक ने सभी बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों से ऐसे प्रोजेक्ट की सूची मांगी है।
अधूरी आवासीय परियोजनाओं की सूची आने के बाद क्षेत्रीय आधार पर उनके लिए योजना तैयार करने की तैयारी है। सरकार अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्टों को दोबारा शुरू कर जहां रीयल एस्टेट सेक्टर में तेजी लाना चाहती है, वहीं घरों की आपूर्ति में बढ़ोतरी कर कीमतों में भी कमी लाने के लिए माहौल बनाना चाहती है।