सोने-चांदी के आयात पर अंकुश लगाने की कोशिशें आखिरकार रंग दिखाने लगी हैं। जून में देश के निर्यात में 4.6 फीसदी की गिरावट के बावजूद व्यापार घाटे में कमी आई है।
इससे पहले मई में व्यापार घाटा सात महीने में सबसे ज्यादा 20 अरब डॉलर के पार पहुंच गया था, लेकिन जून में यह 12.2 अरब डॉलर पर सीमित रहा है।
विदेश व्यापार महानिदेशक अनूप पुजारी ने बताया कि व्यापार घाटे में कमी के पीछे सोने-चांदी के आयात में गिरावट प्रमुख वजह रही है। जून के दौरान सोने-चांदी का आयात 2.45 अरब डॉलर तक सीमित रहा है, जबकि मई में यह 8.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
साल के मुकाबले भी सोने-चांदी का आयात करीब 23 फीसदी घटा है। पिछले दिनों में रुपये की कमजोरी के मद्देनजर सरकार ने सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने जैसे कई कदम उठाए थे, जिनका असर दिखने लगा है। गौरतलब है कि देश में कच्चे तेल के बाद सबसे ज्यादा आयात सोने-चांदी का ही होता है।
जून में देश का कुल निर्यात करीब 4.6 फीसदी की गिरावट के साथ 23.79 अरब डॉलर तक पहुंचा है, जबकि इस दौरान कुल आयात में मामूली कमी दर्ज की गई और यह 36 अरब डॉलर तक सीमित रहा।
हालांकि, गत जून में कच्चे तेल का आयात पिछले साल के मुकाबले 13.74 फीसदी बढ़कर 12.76 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि गैर-तेल आयात में 6.7 फीसदी की कमी आई है।
निर्यात को प्राथमिक क्षेत्र में लाने की मांग
भारतीय निर्यात संगठनों के संघ (फिओ) के अध्यक्ष एम. रफीक अहमद ने निर्यात को प्राथमिक क्षेत्र के तहत कर्ज मुहैया कराने की मांग की है। निर्यात में गिरावट पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जिन देशों की ग्रोथ निर्यात पर टिकी है, उनके निर्यात में भी कमी आई है।
जून के दौरान चीन का निर्यात भी 3 फीसदी गिरा है। उन्होंने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है।