उत्तर प्रदेश सरकार ने नई अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति के बाद एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए छोटे उद्योगों के लिए नई टाउनशिप विकसित करने का निर्णय किया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) निजी निवेश के माध्यम से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) लगाने वालों के लिए टाउनशिप नई नीति बनाई है। इसकी मंजूरी यूपीसीडा निदेशक मंडल की बैठक में बृहस्पतिवार को दी गई।
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रस्तावित टाउनशिप का विकास केवल यूपीसीडा के अधिसूचित विकास क्षेत्रों और इसके प्रस्तावित प्लान के अनुसार ही किया जाएगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम विकसित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में आवंटित की गई ऐसी भूमि जिस पर इकाई बंद हो चुकी हैं या खस्ताहाल में है, उसके पुनर्वास की सुविधा देने के लिए उनके पक्ष में आवंटित अतिरिक्त भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन कराने की सुविधा देने का निर्णय किया गया है।
वहीं, टाउनशिप विकसित करने के लिए राज्य औद्योगिक विकास निगम ख्याति प्राप्त एवं अनुभवी विकासकर्ता कंपनियों से राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्ताव मांगेगा। टाउनशिप नीति के तहत आंतरिक एवं बाह्य विकास कार्य डेवलपमेंट एग्रीमेंट होने की तिथि से पांच वर्ष के अंदर पूरे कराने होंगे।
यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनोज सिंह ने बताया कि नीति के अंतर्गत न्यूनतम भूमि का मानक तय कर दिया गया है। टेक्नालॉजी पार्क और औद्योगिक पार्क टाउनशिप के लिए न्यूनतम 100 एकड़, शिक्षा एवं रसद पार्क आधारित टाउनशिप के लिए 200 एकड़, चिकित्सा, स्वास्थ्य आधारित टाउनशिप के लिए 150 एकड़ और पर्यटन आधारित टाउनशिप के लिए न्यूनतम 25 एकड़ का जमीन का मानक निर्धारित किया गया है।