केंद्रीय बजट 2015-16 में पर्यटन क्षेत्र को तवज्जो नहीं मिलने से पर्यटन क्षेत्र निराश है। क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि सहूलियत तो मिली नहीं, उल्टे सेवा कर की दर बढ़ा दी गई है। पर्यटन क्षेत्र की बात करें तो इसमें बस-कार उपलब्ध कराने से लेकर, होटल, रेस्टोरेंट, हवाई जहाज और रेल गाड़ी में वातानुकूलित श्रेणी में यात्रा सभी क्षेत्र में सेवा कर लगता है।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर आपरेटर्स (आईएटीओ) के अध्यक्ष सुभाष गोयल का कहना है कि सरकार इस तथ्य को समझ रही है कि पर्यटन इस समय सबसे अधिक मात्रा में विदेशी मुद्रा कमा कर दे रहा है, तब भी इस क्षेत्र की उपेक्षा की गई है। आईएटीओ ने सरकार से मांग की थी कि जिस तरह से माल के निर्यात पर सहूलियतें मिलती हैं, उसी तरह से पयर्टन क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं को भी डीम्ड एक्सपोर्ट माना जाए और आमदनी के हिसाब से सेवा कर से छूट मिले। लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उल्टे क्षेत्र पर सेवा कर का बोझ बढ़ा दिया गया।
उनका कहना है कि अब होटल में ठहराना महंगा हो गया, रेस्टोरेंट में खाना-पीना महंगा हो गया। पर्यटकों के घूमने फिरने के लिए इंतजाम किये जाने के लिए टैक्सी-बस किराये पर लेना महंगा हो गया, हवाई जहाज और रेलगाड़ियों में वातानुकूलित श्रेणी का किराया महंगा हो गया। इसका प्रभाव पैकेज की कीमतों पर पड़ेगा और जब पैकेज महंगा होगा तो पर्यटकों की संख्या उस हिसाब से नहीं बढ़ पाएगी जैसा अनुमान है।
हालांकि उन्होंने इस बात के लिए सरकार की प्रशंसा की है कि टूरिस्ट वीजा ऑन अराइवल सेवा के लिए इलेक्ट्रानिक ऑथराइजेशन योजना को 43 देशों से बढ़ा कर 150 देशों तक बढ़ाया जाएगा। उन्होंने मंदिरों के शहर वाराणसी और जालियांवाला बाग समेत दस धरोहर स्थलों में सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए बजट प्रावधान किए जाने का भी स्वागत किया है।