छोटे कारोबारियों के लिए एक अहम समस्या उनकी जरूरत के मुताबिक मशीनरी और कुशल श्रमिक मिलना है। कारोबारियों की इस जरूरत को देश के 15 शहरों में स्थित टूल रूम पूरा करने में काफी काम आ रहे हैं।
इन टूल रूम से छोटे कारोबारियों के लिए जिग, फिक्सचर्स, कटिंग टूल, गेज आदि की जरूरत पूरी हो सकती है। साथ ही यहां से उन्हें तकनीकी रूप से प्रशिक्षित कुशल श्रमिक भी मिल सकते हैं। इसके साथ ऐसे यहां से टूल टेक्नॉलजी ट्रेड के तहत डिग्री या डिप्लोमा कोर्स भी किया जा सकता है।
टूल रूम से फायदा
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय (एमएसएमई) द्वारा 15 शहरों में टूल रूम की स्थापना की गई है। यहां जिग, फिक्सचर्स, कटिंग टूल्स, गेज, प्रेस टूल्स, प्लास्टिक मोल्ड्स, फोर्जिंग डाई, प्रेशर कास्टिंग डाई आदि टूल छोटे कारोबारियों के लिए बनाए जाते हैं।
तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधा
टूल रूम में आठवीं पास से लेकर आईटीआई, इंजीनियरिंग ग्रेजुएट, स्नातक व डिप्लोमा आदि के पाठ्यक्रम हैं। छह महीने से लेकर चार साल तक के इन कोर्सों में मुख्य जोर व्यावहारि प्रशिक्षण (प्रैक्टिकल) पर रहता है । इसके चलते टूल रूम के करीब 98 फीसदी प्रशिक्षुओं को। छात्रों को सामान्य पाठ्यक्रम के जरिए भी औसतन 10 हजार रुपये की नौकरी मिल आसानी से मिल जाती है।
प्रमुख पाठ्यक्रम
टूल और डाई मेंकिंग में डिप्लोमा, ऑटोमेशन और रोबोटिक्स इंजिनयरिंग में डिप्लोमा, प्रोडक्शन इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स कम्युनिकेशन में डिप्लोमा, एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स इन मशीन मेंटेनेंस, सीएनसी मशीनिंग में सर्टिफिकेट कोर्स, वेल्डिंग में बेसिक सर्टिफिकेट आदि प्रमुख पाठ्यक्रम हैं।
कहां है टूल रूम
दिल्ली, लखनऊ, जालंधर, लुधियाना, हैदराबाद, इंदौर, जमशेदपुर, भुवनेश्वर, अहमदाबाद, औरंगाबाद, नागौर, कोलकाता, बंगलूरू, मैसूर, गोवा में स्थित हैं। इसके अलावा 15 और नए टूल रूम बनाने की तैयारी है। इसमें से एक ग्रेटर नोएडा में बनाया जाएगा।
कैसे मिलेगी जानकारी
टूल रूम के जरिए मिलने वाली मशीनरी और पाठ्यक्रम के संबंध में जानकारी के लिए एमएसएमई मंत्रालय के नई दिल्ली स्थित डेवलपमेंट कमिश्नर कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। मंत्रालय की वेबसाइट पर भी पूरी जानकारी उपलब्ध है। इसके अलावा शहरों में स्थित टूल रूम से भी जानकारी ली जा सकती है।