दूरसंचार क्षेत्र अगले पांच वर्ष में 40 लाख नौकरियां पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण बाजार में बढ़ती संभावनाओं और इंटरनेट के प्रसार की बदौलत दूरसंचार क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
ये उम्मीदें ऐसे समय पैदा हुई हैं, जब सरकार देश के सभी 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को हाई स्पीड ब्राडबैंड नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक दूरसंचार क्षेत्र में स्किल्ड टेक्निशियंस, इंजीनियर्स, इंस्टालेशन और मेनटेनेंस सर्विस प्रोवाइडर, सेल्स, मार्केटिंग, एचआर की मांग बढ़ेगी। रैंडस्टैड इंडिया के सीईओ के उप्पालुरी का कहना है कि दूरसंचार क्षेत्र लगभग पिछले दो दशक में 35 फीसदी की औसत ग्रोथ के साथ आक्रामक रूप से बढ़ रहा है।
हालांकि इस सेक्टर में उछाल का दौर खत्म हो चुका है, लेकिन यह बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा करने वाला सेक्टर बना रहेगा। रैंडस्टैंड के आकलन के मुताबिक यह सेक्टर अगले पांच वर्ष में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर 40 लाख से अधिक नौकरियां पैदा करेगा।
कम्पोनेंट मैन्यूफैक्चरर टीई कनेक्टिविटी के मुताबिक पिछले दशक में दूरसंचार सेक्टर सबसे बड़ा नियोक्ता रहा है और 2015 तक 2.75 लाख लोगों की जरूरत होगी। टीई कनेक्टिविटी इंडिया एंड एसएएआरसी नेटवर्क सोल्य्रूशंस डायरेक्टर केके शेट्टी ने कहा कि सही प्रतिभा पाना चुनौती होगी।
शेट्टी का कहना है कि बैंडविड्थ आ जाने और डिजटलाइजेशन पूरा हो जाने के बाद कंटेंट प्रोवाइडर इंडस्ट्री और संबंधित सर्विसेज इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने और दरों को ज्यादा तार्किक बनाने से सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।
डेलॉय हासकिंस एंड सेल्स पार्टनर हेमंत जोशी का कहना है कि मौजूदा समय में दूरसंचार क्षेत्र टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, नेटवर्क अपग्रेडेशन और पर्याप्त स्पेक्ट्रम की उपलब्धता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
उन्होंने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र शोध एवं विकास और टेक्नोलॉजी इन्नोवेशंस के लिए दशकों का समय गंवा चुका है। ऐसे में इन चुनौतियों के समाधान के लिए कई कदमों की जरूरत है।