पश्चिमी देशों की कंपनियां अपने बोर्ड में एशिया के लिए डायरेक्टर्स नियुक्त करने में भारतीय पेशेवरों को वरीयता दे रही हैं। सिंगापुर स्थित एक प्लेसमेंट सेल के विश्लेषण में यह बात सामने आई है।
कंपनी के बोर्ड और अहम भूमिका में अधिकारियों की नियुक्ति में विशेषज्ञता रखने वाली कंपनी डीटीसीए ने अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन की 20 बड़ी कंपनियों के बोर्ड की संरचना का विश्लेषण किया है।
इन कंपनियों में नान-एक्जीक्यूटिव पोजीशन वाले एशियाई अधिकारियों की संख्या 2009 में 9 थी और इस वर्ष यह बढ़ कर 23 हो चुकी है। डीटीसीए का कहना है कि भारतीय अधिकारी इस मोर्च पर आगे निकल रहे है।
मौजूदा समय में आठ भारतीय अधिकारी शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नान एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर की पोजीशन में हैं। पिछले पांच वर्षों में इस ट्रेंड ने जोर पकड़ा है,क्योंकि पश्चिमी देशों की कंपनियां एश्यिाई अर्थव्यवस्था खास तौर पर भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।