केंद्रीय करों में राज्यों को अब पहले के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा हिस्सेदारी मिलेगी। सरकार ने 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है।
इसमें पंचायतों और नगरपालिकाओं के लिए भी अलग से प्रावधान किया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि सरकार ने 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों को मान लिया है।
रिवर्ज बैंक के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी की अध्यक्षता वाले 14वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी को मौजूदा 32 फीसदी से बढ़ा कर 42 फीसदी करने की सिफारिश की थी।
13वें वित्त आयोग में हुआ था 32%
इससे पहले विजय केलकर की अध्यक्षता वाले 13वें वित्त आयोग ने 32 फीसदी की हिस्सेदारी की सिफारिश की थी। अब वर्ष 2015-16 के दौरान राज्यों को केंद्र से कुल 5.26 लाख करोड़ रुपये की राशि मिलेगी, जबकि वर्ष 2014-15 में यह राशि 3.48 लाख करोड़ रुपये थी।
अरुण जेटली ने कहा कि सिफारिशें 1 अप्रैल 2015 से लागू हो जाएंगी और पांच साल तक इसके हिसाब से आवंटन होगा। उनका कहना है कि इन सिफारिशों को स्वीकार कर लेने का मतलब है कि केंद्र सरकार ‘कोऑपरेटिव फेडरेलिज्म’ की पक्षधर है।
पंचायतों के लिए भी है प्रावधान
14वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाने के अलावा पंचायतों एवं नगर पालिकाओं के लिए भी अतिरिक्त प्रावधान किया है।
वित्त मंत्री ने बताया कि पांच वर्षों की अवधि के दौरान पंचायतों 2.09 लाख करोड़ रुपये और नगरपालिकाओं को 87,134 करोड़ रुपये मिलेंगे।
इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी राज्यों को चिट्ठी लिखी है। उनका कहना है कि बढ़ी हुई राशि से राज्य सरकारें अपनी आवश्यकता के हिसाब से योजनाएं बना सकेंगी।