जल्द ही चावल, तुअर, उड़द और बाजरा में वायदा कारोबार करने की छूट मिल सकती है। वायदा बाजार नियामक फारवर्ड मार्केट कमीशन-एफएमसी इन कृषि उपजों में वायदा कारोबार खोलने पर विचार कर रहा है।
वर्ष 2007 से पहले चावल, तुअर, उड़द में वायदा कारोबार की छूट थी, लेकिन महंगाई बढ़ने के डर से इस पर रोक लगाई गई थी। लेकिन अब सरकार इस रोक को हटाने की तैयारी कर रही है। अगले महीने भर के अंदर चावल, तुअर, उड़द और बाजार के वायदा कारोबार को मंजूरी मिल सकती है।
यहां दालों पर हो रहे तीन दिवसीय सम्मेलन पल्सेज कॉनक्लेव-2014 के मौके पर फारवर्ड मार्केट कमीशन के अध्यक्ष रमेश अभिषेक ने अमर उजाला को बताया कि चने और गेहूं में पहले से वायदा कारोबार हो रहा है। इसलिए बाकी जिंसों में वायदा कारोबार शुरू करने में कोई दिक्कत नहीं हैं।
कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स ने चावल, उड़द, तुअर और बाजरा में वायदा कारोबार शुरू करने का अनुरोध किया है। एक्सचेंज के इस अनुरोध पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। एक सप्ताह में एनसीडीईएक्स इन जिंसों के कॉन्टैक्ट तैयार कर प्रपोजल एफएमसी को भेजेगा। इस मामले पर महीने भर में फैसला होने की उम्मीद है। उनका कहना है कि 2007 में जब इन जिंसों के वायदा कारोबार पर रोक लगाई गई थी, तब कीमतों में काफी उतार चढ़ाव था। लेकिन अब नियामक व्यवस्था काफी सुधर चुकी है और कीमतों में भी स्थिरता है।
कमोडिटी ट्रेडिंग को उबारने की कोशिश
नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड-एनएसईएल घोटाले और कमोडिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (सीटीटी) लगने से कमोडिटी ट्रेडिंग में कमी आई है। इसलिए वायदा बाजार नियामक नई एग्री कमोडिटी में वायदा कारोबार का रास्ता खोलने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, एफएमसी के अध्यक्ष का कहना है कि आजकल कमोडिटी की कीमतों में स्थिरता और ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं है।
पीडीएस में दाल बांटने पर जोर
दालों की पैदावार और खपत को बढ़ावा देने के लिए आईपीजीए के अध्यक्ष प्रवीण डोंगरे ने पीडीएस में दालों के वितरण को बढ़ावा देने की मांग की है। उनका कहना है कि खाद्य और पोषण सुरक्षा में दालों की अहम भूमिका है। लेकिन हाल के वर्षों में दालों की पैदावार बढ़ने के बावजूद प्रति व्यक्ति दालों की खपत घटी है।