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स्नैपडील ने भेजा साढ़े नौ हजार का नकली जूता

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कुछ दिनों पहले दिल्ली के सरकारी अधिकारी योगेन्द्र गर्ग ने एक जोड़ी 'नाइकी एयर मैक्स' जूते का ऑर्डर दिया था। इस जूते की कीमत 9,445 रुपए थी, जिसे स्नैपडील से ऑर्डर किया गया था। जब यह जूता डिलिवर हुआ तो गर्ग उसे देखकर हैरान रह गए, क्योंकि वह नकली था।
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गर्ग के अनुसार यह जूता सूरत से आया था। इसके चालन पर वैट का चार्ज तो लिखा गया था, लेकिन टिन नंबर और सीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर की जगह लिखा था- 'लागू नहीं'। इसके अलावा वेबसाइट का नाम भी गलत लिखा गया था।

इस पर nikebetterworld.com की जगह nikebetterwold.com लिखा था, जिसे एक बार में देखकर कोई भी धोखा खा सकता है। साथ ही स्नैपडील ने बिना कंपनी के आग्रह के ही इसकी वापसी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
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धोखेबाजों के खिलाफ होता है एक्शन

स्नैपडील के एक अधिवक्ता ने कहा कि स्नैपडील उन्हीं विक्रेताओं को मौका देता है, जिनका सेल्स रिकॉर्ड अच्छा होता है। वे बोले कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाता है, जो किसी भी तरह की धोखेबाजी करते हैं या नकली सामान देते हैं।

हालांकि, जब गर्ग से नकली नाइकी के जूते के बारे में पूछा गया तो वे बोले कि इसके बारे में वह बाद में बताएंगे। इस मामले को करीब एक सप्ताह हो चुका है, लेकिन अभी तक कोई भी एक्शन नहीं लिया गया है।

ये पहला मामला नहीं है जब स्नैपडील की तरफ से कोई सामान गलत या नकली भेजा गया हो। पहले भी ऐसे कुछ मामले सामने आ चुके हैं। यह सारे मामले स्नैपडील जैसी ऑनलाइन कंपनियों के काम पर एक सवालिया निशान लगाते हैं।

नए के दाम में पुराना मोबाइल

स्नैपडील ने लापरवाही दिखाते हुए एक व्यक्ति को पुराना मोबाइल फोन डिलीवर कर दिया था। हालांकि, ऑनलाइन शॉपिंग में अब ऐसी लापरवाही के कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं।

नई दिल्ली में रहने वाले गौतम सचदेवा ने 24 दिसंबर 2014 को एक एलजी जी2 स्मार्टफोन स्नैपडील से ऑर्डर किया था। गौतम यह फोन अपने पिता को नए साल के गिफ्ट के तौर पर देना चाहता था।

पिता को गिफ्ट देने की गौतम की इस ख्वाहिश को स्नैपडील ने जनवरी में सेकेंड हैंड फोन डिलीवर करके मिट्टी में मिला दिया। गौतम का कहना है कि कंपनी हर प्रोडक्ट को 100% सही और चेक किया हुआ बताती है, लेकिन उनका फोन चेक किया हुआ भी नहीं था।

आईफोन की जगह भेजे लकड़ी के टुकड़े

पिछले महीने पुणे के औंध में रहने वाले दर्शन काबरा ने स्नैपडील से आईफोन ऑर्डर किया था, लेकिन पैकेट खोलते ही मानो उनके पैरों तले जमीन ही खिसक गई। स्नैपडील ने उन्हें बॉक्स में कोई आईफोन नहीं, बल्कि लकड़ी के टुकड़े भेजे थे। दर्शन ने 7 दिसंबर को स्नैपडील से आईफोन 4एस का ऑर्डर दिया था।

ऑर्डर नंबर 3862653450 के साथ दर्शन का ऑर्डर 11 दिसंबर को उनके घर पहुंच गया, जिसे देखकर वे बहुत ही खुश हुए। लेकिन जैसे ही दर्शन ने अपना ऑर्डर खोला तो सारी खुशी हवा हो गई। हालांकि, दर्शन ने यह पैकेट अपने डिलीवरी ब्वाय के सामने ही खोला था, इसलिए उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ।

दर्शन ने दो आईफोन का ऑर्डर दिया था, जिसके लिए इन्होंने कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प चुना था। दोनों आईफोन की कीमत कुल मिलाकर 40,508 रुपए थी। बॉक्स में लकड़ी के टुकड़े देखते ही दर्शन ने यह बॉक्स डिलीवरी ब्वाय को वापस कर दिया।

फोन की जगह भेजे विम बार और ईंट

कुछ समय पहले मुंबई के बोरीवली में रहने वाले लक्ष्मीनारायण कृष्णमूर्ति ने स्नैपडील पर आरोप लगाया था कि उसने फोन के बदले साबुन डिलीवर कर दिया है।

कृष्णमूर्ति ने स्नैपडील से एक सैमसंग डुओस स्मार्टफोन ऑर्डर किया, लेकिन जब उन्होंने बॉक्स खोलकर देखा तो उसमें विम बार और ईंट का टुकड़ा मिला।

शुरुआत में तो स्नैपडील ने इस शिकायत का समाधान नहीं किया, लेकिन जब फेसबुक पर यह पोस्ट वायरल हुई तो 28 अक्टूबर को कंपनी ने 5-6 दिनों में उनके पैसे वापस करने का वादा किया था।
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फ्लिपकार्ट ने लगातार तीन बार भेजा खाली बॉक्स

एक व्यक्ति ने फ्लिपकार्ट से 24 अक्टूबर को पेनड्राइव ऑर्डर की थी, लेकिन उसे खाली बॉक्स डिलीवर कर दिया गया। जब इसकी शिकायत कंपनी को की गई तो इसके बदले सिर्फ 55 रुपए दिए गए। इस गलती को नजरअंदाज करते हुए व्यक्ति ने दोबारा से पेनड्राइव ऑर्डर की। इस बार उसकी मां ने डिलीवरी ब्वाय से ऑर्डर ले लिया और पैसे दे दिए।

आपको बता दें कि दूसरी बार भी कपंनी ने खाली बॉक्स भेजा था। जब इसकी शिकायत कंपनी को की गई तो कंपनी ने इसके खिलाफ कोई कार्रवाई करने के बजाय उसी व्यक्ति पर पेन ड्राइव निकाल कर झूठी अफवाह फैलाने का आरोप लगा दिया।

इसके बाद व्यक्ति ने तीसरी बार पेनड्राइव ऑर्डर की और इस बार डिलीवरी ब्वाय के सामने ही पैकेट को खोलते हुए वीडियो रिकॉर्डिंग की। एक बार फिर खाली पैकेट देखकर व्यक्ति हैरान रह गया और कंपनी को इसकी शिकायत करके इस वीडियो को इंटरनेट पर डाल दिया।

उसका कहना था कि वह इसके बदले किसी तरह का रिफंड नहीं मांग रहा है, वह सबको सिर्फ यह बताना चाहता है कि ऑनलाइन कंपनियां किस तरह से लोगों को बेवकूफ बना रही हैं।
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