छोटे और मझोले कारोबारियों को कारोबार के लिए वर्किंग कैपिटल जुटाना मुश्किल होता जा रहा है। कारोबारियों के अनुसार अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती की वजह से बड़ी कंपनियां उनके भुगतान में देरी कर रही है। कंपनियां 120 दिन तक में कारोबारियों को भुगतान कर रही है। यहीं नहीं, भुगतान अवधि बढ़ने से कारोबारियों को बैंकों से मिलने वाली बैंकिंग डिस्काउंट सुविधा भी लेने में मुश्किल आ रही है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय भी छोटे कारोबारियों की समस्या को मान रहा है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि कारोबार मंदा होने से बड़ी कंपनियों की तरफ से भुगतान में देरी हो रही है। मंत्रालय ने इसी के तहत एडवाइजरी जारी की है कि कारोबारी कंपनियों के साथ सौदे के लिए समझौते करने पर दस्तावेज पर अपनी पहचान छोटे और मझोले उपक्रम के रूप में जरूर दें, जिससे कि जांच में इसका इस्तेमाल किया जा सके।
फरीदाबाद स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट राजीव चावला ने अमर उजाला को बताया कि कारोबार मंदा होने की वजह से अधिकतर कंपनियों ने छोटे कारोबारियों के भुगतान में देरी करना शुरू कर दिया है। पहले भुगतान की अवधि 60 दिन के करीब थी वह अब 120 दिन तक पहुंच गई है। इसकी वजह से कारोबारियों को बैंकों से मिलने बिल डिस्काउंट की भी सुविधा नहीं मिल रही है। चावला के अनुसार इस सुविधा के तहत कारोबारी कंपनियों से मिल के एवज में बैंकों से एडवांस में भुगतान ले सकते हैं। कंपनियों के तरफ से भुगतान में देरी को देखते हुए अब बैंक यह सुविधा देने से हाथ खींच रहे हैं।
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के वाइस प्रेसिडेंट एएल अग्रवाल ने कहा कि भुगतान की अवधि 90-120 दिन तक पहुंच गई है। राज्य विद्युत बोर्ड के भुगतान काफी अटके पड़े हैं। ऐसे माहौल में एमएसएमईडी एक्ट-2006 के प्रावधान का पालन एकदम नहीं हो रहा है। जिसमें 45 दिनों के अंदर कारोबारियों के भुगतान का कानून है।
आरबीआई के सर्कुलर के मुताबिक भुगतान में देरी होने पर कंपनियों को बैंक रेट से तीन गुने के दर से छोटे कारोबारियों को भी भुगतान करने का प्रावधान है। इसके बावजूद हमारे भुगतान अटके हैं। बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार छोटे और मझोले उपक्रमों को दिए गए कर्ज एनपीए हो रहे हैं। जिसकी वजह से बैंक अब कर्ज देने और दूसरी सुविधा देने में काफी सतर्क हो गए हैं। बैंकर्स के अनुसार बैंकों के कुल एनपीए में एसएमई की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी तक पहुंच गई है।