सरकार ने लघु एवं छोटे उद्योगों को आसानी से कर्ज उपलब्ध कराने के लिए कोशिशें तेज कर दी है।
इसके अंतर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) मंत्रालय छोटे उद्योगों को आसानी से कर्ज उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न बैंकों के साथ जल्द ही बातचीत शुरू करने वाला है।
एमएसएमई राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) केएच मुनियप्पा ने बताया कि छोटे कारोबारियों को आसानी से कर्ज उपलब्ध हो सके, इसके लिए हम सरकारी और निजी क्षेत्र के कई बैंकों के साथ बातचीत करने की प्रक्रिया में हैं।
इसकी शुरुआत मंत्रालय इस सप्ताह कर्नाटक के बैंकों से करेगा। मुनियप्पा ने बताया कि 21 जून को बंगलूरू में केनरा बैंक और यूनाइटेड बैंक सहित विभिन्न बैंकों से साथ बातचीत की जाएगी। मंत्रालय इस तरह की बहस अन्य राज्यों में भी कराएगा।
एमएसएमई पर गठित प्रधानमंत्री की टास्क फोर्स ने सूक्ष्म एवं छोटे उद्योगों को कर्ज की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए, उनके कर्ज में सालाना आधार पर 20 फीसदी बढ़ोतरी की सिफारिश की थी।
हालांकि, अभी भी अधिकांश इकाइयों को कर्ज हासिल करने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। देश के निर्यात में एमएसएमई की अच्छी खासी हिस्सेदारी है।
मुनियप्पा ने बताया कि पिछले साल देश के कुल निर्यात में एमएसएमई सेक्टर की हिस्सेदारी 40 फीसदी थी लेकिन इस साल यह घटकर 36 फीसदी रह गई है। इसकी मुख्य वजह वैश्विक बाजारों में मांग में आई कमी है।
हमारी कोशिश एमएसएमई की निर्यात में हिस्सेदारी 40 फीसदी से अधिक करने की है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एमएसएमई सेक्टर का योगदान आठ फीसदी से अधिक है।