देश के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी लाने पर मोदी सरकार के फोकस के बावजूद इस दिशा में उसके कदम खास कारगर होते नहीं दिख रहे हैं। एचएसबीसी की पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी में देश के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर धीमी पड़ कर तीन माह के निचले स्तर पर आ गई। इससे पहले दिसंबर में यह दो साल के सबसे ऊंचे स्तर पर थी। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के इस आंकड़े ने रिजर्व बैंक पर मंगलवार को जारी होने वाली अपनी मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दर में कटौती करने के दबाव को बढ़ा दिया है।
एचएसबीसी की पीएमआई रिपोर्ट में घरेलू और विदेशी बाजारों से मिलने वाले ऑर्डरों में कमी आने को इस सुस्ती की वजह बताया गया है। सोमवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी में पीएम आई घटकर 52.9 अंक पर आ गया। पीएमआई में यह गिरावट लगातार दो माह तक बढ़ोतरी के बाद आई है।
दिसंबर 2014 में यह 54.5 अंक के साथ दो साल के टॉप पर था। पीएमआई का 50 अंक से ऊपर रहना सेक्टर में वृद्धि या विस्तार की अवस्था को दर्शाता है, जबकि 50 अंक से नीचे का स्कोर संकुचन की स्थिति प्रदर्शित करता है। इस लिहाज से पीएमआई में दर्ज की गई गिरावट के बावजूद मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर अब भी आगे तो बढ़ रहा है, पर इसकी गति में दिसंबर की तुलना में धीमापन आया है।
इसी तरह इस देश की मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को घरेलू और विदेशी बाजार से मिलने वाले ऑर्डरों में बढ़ोतरी भी हुई है, पर इस बढ़त दिसंबर की तुलना में कम है। रिपोर्ट के मुताबिक बीते माह सबसे ज्यादा ऑर्डर उपभोक्ता वस्तुएं (कंज्यूमर गुड्स) बनाने वाली कंपनियों को मिले हैं।