रबी की कटाई के बाद खरीफ की बुवाई तक खेत खाली रखने के बजाय किसानों ने कम अवधि की मूंग से कमाई का रास्ता निकाला है।
सिर्फ दो महीने में तैयार होने वाली ग्रीष्म कालीन मूंग का चलन मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़ा रहा है। बाजार में मूंग के अच्छे भाव मिलने की वजह से किसानों को प्रति एकड़ चार-पांच हजार रुपये के निवेश पर 15-20 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।
सिंचाई सुविधाएं बढ़ने, अच्छे दाम और सरकारी प्रोत्साहन के चलते मध्य प्रदेश में इस साल तीसरी फसल के तौर पर ग्रीष्म कालीन मूंग की खेती का क्षेत्र करीब चार गुना बढ़ा है। होशंगाबाद जिले के जो इलाके कभी संतरे की बागीचों के लिए विख्यात थे, अब मूंग उनकी पहचान है।
प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के निदेशक डॉ. डीएन शर्मा ने बताया कि पिछले साल राज्य में करीब 28 हजार हेक्टेअर क्षेत्र में ग्रीष्म कालीन मूंग की खेती थी, जबकि इस साल 1.35 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में मूंग की खेती की जा रही है।
इसे बढ़ावा देने के लिए गर्मियों में नर्मदा के तवा बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत मूंग की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सस्ते बीज, खाद और कीट नाशक उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
होशंगाबाद के तालपुरा गांव के किसान तुलसीराम ने बताया कि पहले गर्मियों में गेहूं की कटाई के बाद सोयाबीन या धान की बुवाई तक खेत खाली पड़ा रहता था, लेकिन इस साल पहली बार मूंग लगाने का फैसला किया है। पिछले साल मूंग का दाम करीब चार रुपये प्रति कुंतल मिला था, जबकि इस साल अभी भाव पांच हजार रुपये से ऊपर है।
मूंग का गढ़ बन रहा है होशंगाबाद
होशंगाबाद संभाग के संयुक्त निदेशक (कृषि) पीके विश्वकर्मा का कहना है परंपरागत तौर पर खरीफ में होने वाली मूंग की खेती की पैदावार बहुत कम रहती है, लेकिन नर्मदा कमांड एरिया में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ अच्छे बीज व खाद मुहैया कराकर किसानों को गर्मियों में मूंग की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
अकेले होशंगाबाद जिले में मूंग का रकबा पिछले साल के 12 हजार हेक्टेअर से बढ़कर इस बार 46 हजार हेक्टेअर तक पहुंच गया है। नए बीजों के चलते पैदावार भी 10-12 कुंतल प्रति हेक्टेअर से बढ़कर 15-16 कुंतल तक पहुंचने की उम्मीद है।