महंगाई के मौसम में अब टेलीविजन देखना भी महंगा हो गया है। सरकार ने सेट टॉप बॉक्स का सीमा शुल्क बढ़ाकर पांच से दस प्रतिशत तक कर दिया है। डिजिटल टीवी की महंगाई का बोझ नहीं उठा पाने वाली छोटे शहरों के लोगों को एफएम रेडियो के मुफ्त मनोरंजन का विकल्प दिया जा रहा है। सरकार ने केबल टीवी डिजिटलाइजेशन के लागू होने के बाद ग्राहकों को तगड़ा झटका दिया है।
सेट टॉप बॉक्स में शुल्क बढ़ाने के साथ ही अब केबल टीवी डिजिटलाइजेशन ग्राहकों के लिए महंगा साबित हो जाएगा। जबकि सरकार ने इसे लागू करते समय दावा किया था कि इस सेवा के अमल में आने के बाद न सिर्फ टेलीविजन में तस्वीर साफ दिखेगी बल्कि केबल टीवी देखना सस्ता भी पड़ेगा।
इसके लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सिर्फ 100 रूपए में फ्री टू एयर चैनल देखने का पैकेज तय किया था। मगर अब जब शुल्क बढ़ने से सेट टॉप बॉक्स ही महंगा हो गया है तो सरकार के सभी दावे धरे के धरे रह गए हैं। सरकार ने ग्राहकों की जेब काट ली है।
दूसरी तरफ सरकार ने अब एक लाख से अधिक आबादी वाले सभी शहरों में निजी एफएम रेडियो शुरू करने की मंजूरी देने का फैसला किया है तो साथ ही 2013-14 में करीब 839 एफएम चैनलों की नीलामी करने का ऐलान भी किया है। इस तरह सरकार ने अब निजी एफएम सेवाओं का विस्तार 294 शहरों तक फैलाने की नींव रख दी है।
निजी रेडियो कंपनियां लंबे समय एफएम रेडिया के तीसरे चरण के विस्तार का इंतजार कर रही थी। हालांकि इसके विस्तार का ऐलान सरकार ने 2012-13 में किया गया था। मगर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक कुछ तकनीकी पहलुओं के कारण यह काम रूका हुआ था।