बाजार नियामक सेबी को सहारा समूह द्वारा भेजे गए कागजातों की जांच के बाद गंभीर खामियां मिली हैं।
सेबी ने इनमें बड़े पैमाने पर फर्जी निवेशकों की संख्या होने की भी आशंका जताई है। 20,000 करोड़ रुपए से अधिक के रिफंड के अपने दावे को साबित करने के लिए सहारा ने ट्रकों में भरकर कागजात सेबी के पास भेजे थे।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) वास्तविक निवेशकों, जिन्होंने सहारा की कंपनियों में पैसा लगाया, का पता लगाने के लिए भाषाई अखबारों में सार्वजनिक सूचना जारी करने सहित अन्य रास्ते अपनाने पर विचार कर रहा है। सेबी खासकर देश के उत्तरी और पूर्वी राज्यों में यह उपाय करना चाहता है।
कोर्ट के आदेश के बाद सहारा समूह ने सेबी के पास 5,120 करोड़ रुपए जमा कराए थे। समूह ने दावा किया था कि उसने सभी निवेशकों को रिफंड कर दिया है। 2,000 करोड़ रुपए निवेशकों को सीधे नकद भुगतान किए गए।
कोर्ट ने अगस्त 2012 में सहारा समूह को 24,000 करोड़ रुपए से अधिक के रिफंड का आदेश दिया था। सेबी सहारा के सीधे नकद रिफंड करने के दावों को खारिज कर चुका है।
इस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।