निवेशकों को चौबीस हजार करोड़ रुपये न लौटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सहारा समूह की खिंचाई की।
साथ ही कहा कि यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय और दोनों कंपनियों के निदेशकों को अदालत में पेश होना पड़ेगा।
जस्टिस केएस राधाकृष्णन व जस्टिस जेएस खेहर की पीठ ने सिक्योरिटीज अपीलेट ट्राइब्यूनल (सैट) पर भी कड़ी नाराजगी जताई जिसने सेबी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सहारा के खिलाफ कार्रवाई करने से रोका।
पीठ ने कहा कि सहारा समूह को 31 अगस्त तक पैसे लौटाए या फिर व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेशी का सामना करे। हालांकि पीठ ने सहारा की ओर से पेश हुए अधिवक्ता की गुजारिश पर कोई आदेश नहीं जारी किया।
अधिवक्ता ने आग्रह किया कि अदालत सहारा प्रमुख के पक्ष को सुने बगैर इस मामले में कोई आदेश न जारी करे। अदालत ने मामले की सुनवाई को इसके बाद 24 जुलाई तक के लिए टाल दिया।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि हमारे फैसले का अनुपालन करें, अन्यथा हम आदेश जारी करेंगे। इस मामले में या तो आप निवेशकों की रकम वापस कर दें या फिर व्यक्तिगत तौर पर अधिकारियों को अदालत में तलब किए जाने के लिए तैयार रहें।
पीठ ने यह टिप्पणी सहारा समूह की ओर से 24,000 करोड़ रुपये सेबी में न जमा किए जाने पर की। यह रकम करीब तीन करोड़ निवेशकों को लौटाई जानी है। अदालत ने गतवर्ष 31 अगस्त को आदेश जारी किया था कि सहारा समूह नवंबर के अंत तक पैसा लौटा दे।
इसके बाद इस निर्धारित अवधि को कंपनियों की गुजारिश पर बढ़ाया गया था। साथ ही अदालत ने कंपनियों को 5,120 करोड़ रुपये तत्काल और दस हजार करोड़ जनवरी के पहले सप्ताह, जबकि शेष राशि फरवरी के पहले सप्ताह में सेबी के पास जमा कराने का आदेश दिया था। सहारा ने 5,120 करोड़ रुपये सेबी में जमा कर दिए थे।