निवेशकों को 20 हजार करोड़ रुपए की अदायगी के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सहारा समूह पर सवाल उठाए हैं।
बाजार नियंत्रक संस्था सेबी ने आरोप लगाया था कि सहारा समूह की कंपनियों ने इसके लेन-देन से संबंधित कोई दस्तावेज संस्था को मुहैया नहीं कराए हैं।
सहारा की ओर से दावा किया गया है कि उसने 20 हजार करोड़ रुपए अपने निवेशकों को लौटा दिए हैं, जबकि इस मामले में सेबी ने आरोप लगाया है कि यह रकम कहां से कैसे जुटाई गई है।
उसके बारे में सहारा की ओर से कोई दस्तावेज नहीं पेश किए गए हैं।
न्यायाधीश केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की बेंच ने बाजार नियामक संस्था सेबी को आदेश दिए हैं कि वह यह पता लगाए कि इतनी बड़ी राशि का ट्रांसफर कंपनी लॉ और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइडलाइन के मुताबिक हुआ है कि नहीं।
इस सुनवाई की शुरुआत में सेबी की ओर से सीनियर वकील अरविंद दत्तार ने दावा किया था कि सहारा ग्रुप उपरोक्त मनी ट्रॉयल के मामले में बैंक के दस्तावेज नहीं पेश कर सका था, जो कि ये बता सकें कि सहारा ने अपने निवेशकों को रकम लौटा दी थी। उनके मुताबिक सारा लेन-देन नकद में ही हुआ था।
दत्तार ने कहा कि सहारा ग्रुप का कहना है कि सभी निवेशकों को नकद राशि दी गई, जिसके चलते सारे लेन-देन का कोई बैंक रिकॉर्ड नहीं है।
उन्होंने कहा कि सहारा क्रेडिट कॉपरेटिव सोसायटी की ओर से 16 हजार करोड़ रुपए मई-जून 12 में सहारा इंडिया को दिए थे।
वहीं, इस मामले में सहारा समूह की ओर से वरिष्ठ वकील रामजेठमलानी ने सेबी के आरोपों का जवाब देने के लिए कोर्ट से वक्त मांगा है।
मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।